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बाढ़ में डूबे घर, आंखों में बेबसी… अपनों की तरह दर्द बांट रहे एसडीएम कुणाल गौरव

Surendra nath Dwivedi

Reported By:

Sep 30, 2026  |  6:36 PM

92 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
बाढ़ में डूबे घर, आंखों में बेबसी… अपनों की तरह दर्द बांट रहे एसडीएम कुणाल गौरव

कहीं राहत का राशन, कहीं ढांढस के बोल… तटबंध की निगरानी के साथ पीड़ितों के बीच खड़े हैं तहसील के अधिकारी

आपके लिए और..- बाढ़ में राहत का सहारा बने एसडीएम कुणाल गौरव, गांव-गांव...

कुशीनगर। बाढ़ का पानी सिर्फ घरों में नहीं घुसता, वह लोगों की खुशियां, उम्मीदें और वर्षों की मेहनत भी अपने साथ बहा ले जाता है। किसी के घर का चूल्हा ठंडा है तो किसी की आंखों में अपने डूबे आशियाने का दर्द है। कोई अपने बच्चों की चिंता में परेशान है तो कोई इस इंतजार में है कि आखिर कब पानी उतरेगा और जिंदगी फिर पटरी पर लौटेगी। ऐसे कठिन समय में जब बाढ़ पीड़ितों को सबसे ज्यादा जरूरत किसी अपने के साथ खड़े होने की होती है, तमकुहीराज के एसडीएम कुणाल गौरव और उनकी राजस्व टीम राहत लेकर उनके बीच पहुंच रही है।

एपी तटबंध टूटने के बाद तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के कई गांवों में पैदा हुए बाढ़ के संकट के बीच एसडीएम कुणाल गौरव लगातार ग्राउंड पर सक्रिय हैं। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच वह प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी पीड़ा सुन रहे हैं, उनका हाल जान रहे हैं और जरूरत के मुताबिक राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुटे हैं। उनके साथ राजस्व विभाग की टीमें भी गांव-गांव पहुंचकर प्रभावित लोगों तक खाद्य सामग्री और जरूरी सहायता पहुंचा रही हैं।राहत सामग्री लेकर जब प्रशासन की टीम किसी बाढ़ प्रभावित परिवार के दरवाजे पर पहुंचती है तो वहां सिर्फ राशन नहीं पहुंचता, बल्कि संकट में प्रशासन के साथ खड़े होने का भरोसा भी पहुंचता है। बाढ़ के पानी से घिरे लोगों के लिए उस समय राहत की एक छोटी-सी मदद भी बहुत बड़ी उम्मीद बन जाती है।

इसी मानवीय संवेदना के बीच एसडीएम कुणाल गौरव का एक वाक्य लोगों के दिल को छू रहा है—
“ये लोग मेरा परिवार हैं। संकट की इस घड़ी में इन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। हर संभव मदद का भरोसा है।”
यह महज एक प्रशासनिक अधिकारी का बयान नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए भरोसे के शब्द हैं, जिनके सामने इस समय जीवन की सबसे कठिन घड़ियों में से एक है। एसडीएम का प्रभावित लोगों के बीच जाकर उनकी बातें सुनना और मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देना इस बात का संदेश दे रहा है कि राहत कार्य सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन प्रभावितों के बीच खड़ा है।

एक तरफ तटबंध की चिंता, दूसरी तरफ बाढ़ में घिरे परिवार

एसडीएम कुणाल गौरव के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक ओर एपी तटबंध की सुरक्षा और संवेदनशील स्थानों की निगरानी, तो दूसरी ओर बाढ़ से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत उपलब्ध कराना। राजस्व टीम के साथ वह लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। तटबंध के संवेदनशील हिस्सों का जायजा लेने के साथ प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था को भी गति दी जा रही है।
तटबंध पर खतरे की आहट मिलते ही प्रशासनिक टीम सक्रिय हो जाती है। वहीं बाढ़ प्रभावित परिवारों की जरूरत की सूचना मिलते ही राहत सामग्री लेकर टीमें गांवों की ओर रवाना हो रही हैं। यानी प्रशासन के लिए तटबंध की एक-एक दरार और पीड़ित परिवार की एक-एक जरूरत महत्वपूर्ण बनी हुई है।

‘साहब’ नहीं, संकट में साथ खड़ा अपना आदमी
बाढ़ की विभीषिका के बीच प्रभावित लोगों के बीच एसडीएम कुणाल गौरव की मौजूदगी का एक अलग ही असर दिखाई दे रहा है। जिन लोगों के घर पानी में घिर गए हैं, जिनके सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है, उनके बीच अधिकारी का पहुंचना उन्हें यह एहसास करा रहा है कि इस मुश्किल समय में वे अकेले नहीं हैं।
राहत बांटते समय किसी के चेहरे पर चिंता है तो किसी की आंखों में अपने घर और सामान के नुकसान का दर्द। कोई बच्चों की चिंता बताता है तो कोई पशुओं को लेकर परेशान नजर आता है। ऐसे में प्रशासनिक टीम सिर्फ राहत सामग्री वितरित नहीं कर रही, बल्कि लोगों की बातें सुनकर उन्हें ढांढस भी बंधा रही है।
बाढ़ का पानी कब उतरेगा, यह प्रकृति के हाथ में है, लेकिन संकट में किसी का हाथ थामना इंसान के हाथ में है। तमकुहीराज में फिलहाल प्रशासन इसी मानवीय जिम्मेदारी को निभाता नजर आ रहा है।

राहत अभियान जारी, हर प्रभावित तक पहुंचने की कोशिश

प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों तक पका हुआ भोजन, खाद्य सामग्री और राहत किट पहुंचाने का सिलसिला जारी है। राजस्व टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रखा गया है। एसडीएम कुणाल गौरव की निगरानी में टीमें जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं की जानकारी ले रही हैं।
बाढ़ के इस कठिन दौर में तमकुहीराज प्रशासन का यह प्रयास प्रभावित लोगों के लिए सिर्फ सरकारी मदद नहीं, बल्कि मुसीबत की घड़ी में उनके साथ खड़े होने का भरोसा बन रहा है।

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