कुशीनगर। एक ही जगह कई वर्षो तक नौकरी करनी हो तो बाल विकास परियोजना कार्यालय मोतीचक से सीखिए। यहां जो एक बार तैनात हो गया, उसका वर्षो तक स्थानांतरण ही नहीं हुआ। यहां पिछले दस वर्षों से तैनात मुख्य सेविकाएं जहाँ भ्रष्टाचार की जड़े मजबूत कर रही है वही कर्मचारी सेवा नियमावली की धज्जियां उड़ा रही है, लेकिन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी, को इस मामले से कुछ लेना देना नही है जिससे ये मुख्य सेविकाएं एक ही कार्यालय में अंगद की तरह पांव जमाये बैठी है।
बता दें कि बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय मोतीचक में तीन मुख्य सेविकाओं की तैनाती है। सबका अलग-अलग कार्य क्षेत्र का बंटवारा है। मुख्य सेविका जो संविदा पर है पिछले 2004 से यहां नियुक्ति हुआ जो आज डेढ़ दशक से ज्यादा हो गया है। कई महीनों तक ये क्षेत्र में नही जाती है न केंद्र पर पहुंचती है। ज्यादतर छुट्टियों पर ही रहती है जिससे उस क्षेत्र के लोगों में काफी आक्रोश है। यही हाल और का है जो पिछले 2012 से मुख्य सेविका के पद तैनात है। ये मुख्य सेविकाएं केंद्र पर कम कार्यकत्रियों से अवैध वसूली के लिए खासी पहचान बनाई हुई है। यदि नियमों की चर्चा करें तो एक मुख्य सेविका मात्र तीन साल तक कार्यालय में तैनात रह सकती हैं। परंतु यहां तो सारे नियम कानून इसी कार्यालय में बनते-बिगड़ते हैं। इतने वर्षो से एक ही जगह नियुक्ति सवालों के घेरे में है, जिसकी जांच कराते हुए क्षेत्रीय लोगों ने स्थानांतरण की मांग किया है। इस सम्बंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी शैलेश कुमार राय से मामले को अवगत कराया गया तो उन्होंने कहा कि अभी कुछ दिन पहले तीन सेविकाओं को हटाया गया है। शासन स्तर से जो आदेश प्राप्त होगी उसके तहत स्थानांतरण किया जायेगा।
एक मुख्य सेविका को मिला है सीडीपीओ का प्रभार: पिछले 2012 से मुख्य सेविका के पद पर तैनात एक को सीडीपीओ का प्रभार मिला है। सूत्रों के मुताबिक प्रभार मिलते ही आगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा पुष्टाहार उठान के दिन 300 रुपये अवैध तरीके से वसूली कराए जाने का फरमान जारी किया गया है। कुछ आगनबाड़ी कार्यकत्रियां अपना नाम न छापने के शर्त पर बताया कि ये वसूली विभाग के उच्चाधिकारियों के आदेश पर होता है और इनके द्वारा पहुंचाया जाता है। कुल मिलाकर मोतीचक सीडीपीओ कार्यालय में भ्रष्टाचार की जड़े दिन प्रतिदिन मजबूत होती जा रही है।
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