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ख़ुदा के प्रति ईमान,त्याग व समर्पण का प्रतीक है -ई दुल अजहा (बकरा ईद )

न्यूज अड्डा डेस्क

Reported By:

Jun 28, 2023  |  8:14 PM

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ख़ुदा के प्रति ईमान,त्याग व समर्पण का प्रतीक है -ई दुल अजहा (बकरा ईद )
  • पैग़म्बर इब्राहिम और इस्माइल अ.के ख़ुदा के प्रति समर्पण और उनके कुर्बानियों का यादगार है 

कसया/कुशीनगर । इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे बड़ा पर्व  ईद उल -अजहा (बकराईद )  माना जाता है l पहला सबसे बड़ा पर्व ईद- उल- फितर (ईद )है , जो रमजान का पुरे एक महीना रोजा रखने के बाद मुसलमान ईद मनाते हैं ,ठीक इसी प्रकार ईद -उल -अजहा का पर्व है जो पुरे विश्व में मुस्लिम समुदाय मनाता है l बकराईद पर्व ईद के लगभग 70दिन बाद पड़ता है l इसी महीने में हज का अरकान भी पूरा किया जाता है l ईद की तरह इस दिन भी सेवईया हर मुसलमान के घर बनता है, और ईद की तरह नमाज मस्जिदों व ईदगाहो में पढ़ें जाते हैं l इस दिन भी नमाज पढ़कर  एक दूसरे से गले मिलकर लोग  मुबारकबाद देते हैंl  l ईद के दिन सेवईया  मुँह मीठा कर नमाज अता करने  जाते है, लेकिन बकराईद के दिन नमाज अता कर  घर आने पर सेवईया खाकर मुँह मीठा करतें है l इस दिन भी लोग गरीबो में जकात, सदका व खैरात देते है l ईद -उल -अजहा (बकराईद) पर्व मुसलमानो  को सच्चाई और ईमान की राह में अपना सबकुछ कुर्बान कर देने का सन्देश देता है l

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ईद -उल -अजहा इस्लामिक तारीखों के मुताबिक  पैग़म्बर हजरत इब्राहिम अ., जो अल्लाह के एक हुक्म पर अल्लाह (ईश्वर )के प्रति अपने समर्पण व ईमान को दिखाते हुए अपने सबसे अजीज इकलौते बेटे हजरत इस्माइलअ. की कुर्बानी देने को तैयार हो गये, और जब अपनी बीवी से इजाजत लेकर अपने बेटे को नहला -धुलाकर, सुरमा व खुशबू लगाकर रेगिस्तान में सुनसान जगह पर कुर्बानी देने के लिये लें जाने लगे तो रास्ते में हजरत  इस्माइल ने पूछा अब्बा जान आप हमें कहा लें, जा रहे हो, तो हजरत इब्राहिम अ. ने कहा बेटे हम आपको अल्लाह  के हुक्म से उनकी राह में आपकी  कुर्बानी देने जा रहा हूँ, इस पर इस्माइल ने कहा आप और हम बड़े खुश नसीब है जो कि अल्लाह ने आपसे मेरी कुर्बानी मांगी है l इस तरह हजरत इब्राहिम अ. और उनके बेटे इस्माइल अ.आगे बढ़ते गये और जब पहाड़ो के बीच पहुंचे तो बेटे इस्माइल को लेटाकर ज्योही गला रेतने (जिबह )करने के लिये चाकू भिड़ाया,तो उसी वक्त  उनके बेटे इस्माइल ने कहा अब्बा जान आप अपने आँखो पर पट्टी बांध लें कहीं खुदा की राह में मेरी कुर्बानी देते समय आप के हाथ न कॉप जाय और आप मोह -माया में न पड़ जाये l इस बात पर हजरत इब्राहिम अ. ने अपने और बेटे इस्माइल की आँखो पर पट्टी बांधी  और फिर  बेटे इस्माइल के गर्दन पर छुरी चलायी और गला रेतने का प्रयास किया कि , उसी वक्त  अल्लाह ने फरिस्ते जिब्रिल अमीन को हुक्म दिया कि इस्माइल की जगह दुम्बा एक जानवर रख दो l इस प्रकार फरिस्ता जिब्रिल ने हजरत इस्माइल की जगह एक दुम्बा रख दिया और दुम्बा जानवर हजरत इब्राहिम अ. के हाथो  हलाल हो गया l जब हजरत इब्राहिम ने आँखो से पट्टी हटायी तो देखा कि इस्माइल की जगह दुम्बा जो  एक जानवर है, जिबह हो गया है,और उनके बेटे इस्माइल को एक खरोच तक नही आयी l इस पर  वहाँ मौजूद फरिस्ता जिब्रील अमीन ने कहा कि अल्लाह ने आप की कुर्बानी कबूल कर लीं है, और उन्ही के हुक्म से मै यहाँ आया हूँ l

इस्लामी किताबों में इस कुर्बानी के बारे में कहा गया है कि काफ़ी उम्र बीतने के बाद भी हजरत इब्राहिम अ. की कोई औलाद नही हुआ थाl हजरत इब्राहिम अ. ने  मक्का शरीफ की दीवार(बैतूल मुकद्दस )पकड़ कर इतना रोये की पूरी दीवार आँसूओ से भींग गया और उनकी दुआओ को अल्लाह ने कबूल कर,उन्हें इस्माइल के रूप में औलाद दिया l इस्माइल जैसे औलाद को पाकर पैग़म्बर  इब्राहिम अ. बहुत खुश थे और उनसे बहुत प्यार करतें थे l इस्माइल को बिना देखे उनको चैन नही आता था l इन्ही लाड -प्यारो को देख कर अल्लाह ने इब्राहिम का इम्तेहान लेने के लिये ख्वाब में अल्लाह ने कहा या दिखाया और उनकी कई परीक्षाएं लीं, सभी परीक्षाओ में हजरत इब्राहिम अ. पास हुए l हजरत इब्राहिम अ. के बेटे इस्माइल भी आगे चलकर पैग़म्बर बने l  इसी दिन से जायज जानवरो की कुर्बानी का सिलसिला चालू हुआl  दुनिया का हर एक  मुस्लमान  इस दिन कुर्बानी  अपने हैसियत के मुताबिक एक जायज जानवर का देता है  तथा  कुर्बानी किए गये  जानवर का  गोस्त तीन बराबर हिस्सों में तक्सीम करता है l तीन हिस्सों में से एक हिस्सा स्वय रखता है तथा  दूसरा व तीसरा हिस्सा गरीबो, दोस्तो , रिस्तेदारो, व सगे -सम्बन्धियों में बाट देता है l शरीयत के मुताबिक कुर्बानी हर उस मुसलमान पर वाजिब है जिसके पास कम से कम 13हजार रूपये या उतने ही कीमत के सोना -चाँदी या जेवरात हो,या रूपये, सोना -चाँदी तीनों मिलाकर इतने रकम हो,तो उसके ऊपर कुर्बानी कराना वाजिब है l

ईदु-उल. अजहा  के पर्व  पर ही दुनिया का हर हैसियत मंद मुस्लमान हज करने के लिए सऊदी अरब के मक्का मदीना जाता है, और वहाँ हज के अरकान पूरा क़र  कुर्बानी  करता है, फिर  वापस घर आते है l कल गुरुवार को जनपद कुशीनगर सहित पुरे भारत देश में ईद -उल -अजहा की नमाज पढ़ी जाएगी और पर्व को मनाया जाएगा l 

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