अहिरौली बाजार/कुशीनगर।कप्तानगंज विकास खण्ड क्षेत्र अंतर्गत स्थित ग्राम सभा बरडीहा निवासी भगवन्त सिंह के आवास पर चल रहे।नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथावाचक अजय पाठक ने श्रोताओं को एकादशी व्रत के बारे में बताते हुए कहा कि एकादशी व्रत भगवान विष्णु की पूजा और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए रखते हैं।
एकादशी व्रत करने से व्यक्ति के पाप मिट जाते हैं।जीवन के अंत में भगवान विष्णु की कृपा से उन्हें मोक्ष मिलता है।हर माह में दो एकादशी व्रत होते हैं।हिंदू कैलेंडर के अनुसार पहले माह चैत्र के कृष्ण पक्ष की एकादशी से इसका प्रारंभ होता है इसे पापमोचिनी एकादशी कहते हैं।वहीं आमलकी एकादशी साल की अंतिम एकादशी होती है।जो फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को होती है।
भगवान की भक्ति में भक्त कभी खुद को संतुष्ट नहीं मानता बल्कि वह लगातार प्रभु में लीन रहता है।
उन्होंने कहा कि भक्त दो प्रकार के होते हैं। जो ज्ञानी श्रोता होता है वह कम समय में समझ जाता है लेकिन जो भक्त होता है।वह कभी भक्ति से संतुष्ट नहीं होता है।वह हरदम प्रभु की भक्ति में लीन रहता है। भागवत कथा का रस मृत्यु लोक में प्राप्त होता है।इस रस की दूसरे लोकों में प्राप्ति नहीं है।भागवत कथा का रस वहीं पा सकता है जो रसिक होता है। जीवन में कई रसों का स्वाद मिलता है लेकिन सबसे प्रमुख रस राम नाम रस है।
भोजन कितना भी अच्छा हो लेकिन राम रस के बगैर स्वादिष्ट नहीं हो सकता है।उसी तरह जीवन में राम नाम रस के बिना सब कुछ अधूरा है।कथा समापन के बाद श्रोताओं ने प्रसाद ग्रहण किया।इस मौके पर प्रेम नारायण सिंह देवेन्द्र प्रताप सिंह राम सिंह संतोष सिंह देवराज सिंह किशन सिंह आदि मौजूद रहे।
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