जटहा बाजार/कुशीनगर। जिले के नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के गांव नौरंगिया मे बना गाँधी चबूतरा पश्चिमी चंपारण यात्रा की आज भी गवाही देता है।नील कि खेती करने वालों किसानों के समर्थन मे साल1917में चंपारण यात्रा मे निकले बापू नौरंगिया के एक बगीचे मे रूके थे और ग्रामीणों को अहिंसावादी तरीकें से अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया था।हिन्दू -मुस्लिम एकता प्रतीक यह गाँधी चबूतरा लोगों को बापू की याद दिलाती है।बापू की यादों को अब भी लोग अपने जेहन मे समेटे हुए है।अब तो यहाँ चबूतरा के पास ही वाचनालय भी बनवाया जा रहा है।नील की खेती करने वाले किसानों राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर पश्चिमी चंपारण जा रहे महात्मा गाँधी 17अप्रैल1917 को कुशीनगर जिले के नौरंगिया में पहुंचे थे।यहाँ स्थित एक बगीचे मे रूककर बापू ने सिर्फ़ जलपान किया था।
ग्रामीणों ने ऐतिहासिक जगह को आजादी के आंन्दोलन में नौरंगिया की सहभागिता का प्रतीक मानते हुए यहाँ चबूतरा का नाम दिया ।बढ़ते काल चक्र के साथ ही उस बगीचे का वजूद न सिर्फ।अतिक्रमण के चलते खत्म हो गया बल्कि गांधी चबूतरे को भी लोगों कि नजर लग गई।वही कुछ समाजसेवियों की पहल पर तत्कालीन डीएम रिग्जयान सैंफिल की पहल पर शहीद स्मारक बना कर यहां शहीदों के नाम पर शिलापट्ट लगा दिया।
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