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हाटा में नाली के दूषित पानी को बोरवेल में डालने पर डीएम सख्त, एनएचएआई को तत्काल रोक लगाने का निर्देश

Ved Prakash Mishra

Reported By:

Aug 22, 2026  |  4:14 PM

35 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
हाटा में नाली के दूषित पानी को बोरवेल में डालने पर डीएम सख्त, एनएचएआई को तत्काल रोक लगाने का निर्देश
  • एक सप्ताह में मांगी कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट, लापरवाही पर होगी कानूनी कार्रवाई

हाटा/कुशीनगर। राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण एवं निर्माण कार्य के दौरान नाली के दूषित पानी को बोरवेल के माध्यम से सीधे भूगर्भ में प्रवाहित किए जाने की शिकायत को जिलाधिकारी कुशीनगर ने गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), गोरखपुर के परियोजना निदेशक को तत्काल इस प्रक्रिया पर रोक लगाने तथा संबंधित निर्माण स्थलों पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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जिलाधिकारी कार्यालय से जारी पत्र में बताया गया है कि हाटा नगर क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण एवं निर्माण कार्य के दौरान कई स्थानों पर नाली के दूषित जल को भूजल रिचार्ज के उद्देश्य से बनाए गए बोरवेल में प्रवाहित किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में इससे भूजल के प्रदूषित होने की आशंका जताई गई थी। मामले में केंद्रीय भूजल बोर्ड के पत्र एवं सीपीग्राम्स पोर्टल पर प्राप्त शिकायत के संदर्भ का भी उल्लेख किया गया है।

जिलाधिकारी ने उत्तर प्रदेश भू-गर्भ जल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम, 2019 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि कुओं/बोरवेल में अपशिष्ट, नाली अथवा बहिःस्राव का निस्तारण प्रतिबंधित है। साथ ही खुले मैदान, सड़क अथवा कृषि भूमि पर गिरने वाले वर्षाजल के अलावा भूगर्भ जल के कृत्रिम पुनर्भरण के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अधिनियम की धारा 39(2) के तहत ऐसे उल्लंघन दंडनीय अपराध हैं। इसमें न्यूनतम दो वर्ष से तीन वर्ष तक के कारावास तथा पांच लाख से दस लाख रुपये तक के अर्थदंड का प्रावधान बताया गया है।

एक सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट

जिलाधिकारी ने एनएचएआई को निर्देशित किया है कि संबंधित सभी निर्माण स्थलों पर नाली अथवा अपशिष्ट जल को बोरवेल के माध्यम से सीधे भूगर्भ में प्रवाहित करने की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से बंद कराते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए। कार्रवाई की विस्तृत आख्या पत्र प्राप्ति के एक सप्ताह के भीतर जिलाधिकारी कार्यालय तथा केंद्रीय भूजल बोर्ड, उत्तरी क्षेत्र, लखनऊ को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में उचित कार्रवाई या आख्या प्राप्त नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिनियम की धाराओं 39, 44 एवं 46 के तहत आगे की विधिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई स्वतः शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए संबंधित प्राधिकरण को जिम्मेदार माना जाएगा।

पत्र की प्रतिलिपि भूगर्भ जल विभाग, केंद्रीय भूजल बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा शिकायतकर्ता को भी आवश्यक कार्रवाई एवं सूचना के लिए भेजी गई है। शिकायतकर्ता के रूप में पत्र में हाटा के गांधी नगर स्थित एनएच-28, डब्ल्यूएन-21 का उल्लेख किया गया है।

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