सुरेंद्र नाथ द्विवेदी/मो. असलम
कुशीनगर। कुशीनगर के लाल, लोकप्रिय साहित्यकार और सर्व भाषा ट्रस्ट के समन्वयक केशव मोहन पाण्डेय को विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर द्वारा विद्यावाचस्पति (पी-एच डी.) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। केशव मोहन पाण्डेय को यह उपाधि हिंदी और भोजपुरी साहित्य की सतत सेवा और संवर्धन के लिए दिया गया है।
पकड़ियार पूरब पट्टी, तमकुही रोड के स्व बनारसी पाण्डेय के सबसे कनिष्ठ पुत्र केशव मोहन पाण्डेय वर्तमान में दिल्ली में रहते हैं तथा हिंदी-भोजपुरी में लेखन-कार्य करने के साथ ही सर्व भाषा ट्रस्ट के द्वारा सभी भाषाओं के संरक्षण-संवर्धन में लगे हुए हैं। उन्होंने ‘सर्वभाषा’ पत्रिका के माध्यम से देश की पचास से अधिक भाषाओं-बोलियों की रचनाओं को प्रकाश में लाने का महती कार्य किया है। केशव मोहन पाण्डेय की अब तक दर्जनों पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने अनेक पुस्तकों का सम्पादन भी किया है। अभी हाल हीं में उनकी दो अनूदित पुस्तकें भी प्रकाश में आई हैं। ‘शिखरों से आगे’ हिंदी उपन्यास का और ‘छुट्टियां’ डोगरी बाल-उपन्यास का भोजपुरी में अनुवाद हुआ है। उनके इन साहित्यिक गतिविधियों के लिए ‘साहित्य मंडल’ नाथद्वारा की ओर से काव्य-कलाधर, ‘अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन’ द्वारा हरिशंकर वर्मा पुरस्कार (एक के साथ ही डोगरी भाषा अकादमी, जम्मू द्वारा भी सम्मानित किया गया है। सम्मान के इसी क्रम में ‘विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर’ द्वारा विद्यावाचस्पति (पी-एच डी.) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह पूरे कुशीनगर जनपद का सम्मान है।
इस सम्मान के लिए मित्रों और साहित्यकारों के अतिरिक्त क्षेत्र के साहित्यकारों-मित्रों ने भी उन्हें बधाइयाँ दी। एक प्रश्न के उत्तर में केशव मोहन पाण्डेय जी ने कहा कि वे सभी भाषाओं की सेवा के साथ अपनी माटी और मातृभाषा के साहित्यिक-विकास के लिए सदा लगे रहेंगे।
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