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कुशीनगर: धूमधाम से मनायी गयी सम्राट अशोक की 2326 वीं जयंती

न्यूज अड्डा डेस्क

Reported By:

Apr 9, 2022  |  9:16 PM

804 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
कुशीनगर: धूमधाम से मनायी गयी सम्राट अशोक की 2326 वीं जयंती
  • बुद्ध के शांति, अहिंसा व सत्य के उपदेशों का विश्व में किया प्रसार: भन्ते ज्ञानेश्वर
  • अशोक ने सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता की नीति अपनाई: डॉ निगम

कसया/कुशीनगर। बुद्ध स्थली कुशीनगर स्थित श्रीलंका बुद्ध बिहार परिसर में सम्राट अशोक की 2326 वीं जयंती धूमधाम से मनायी गयी। जयंती अवसर पर बौद्ध भिक्षुओं व श्रद्धालुओ ने तथागत बुद्ध व बिहार में बने अशोक स्तंभ का पूजन किया।

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सम्राट अशोक सोसल वेलफेयर सोसाइटी कुशीनगर के तत्वाधान में इस अवसर पर “प्रियदर्शी सम्राट अशोक महान की लोकनीति” विषय पर संगोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि भन्ते ज्ञानेश्वर ने कसम्राट अशोक को महान शासक बताते हुए कहा कि अशोक ने राष्ट्र को एक सूत्र में बांधा और कुशल शासन प्रणाली के चलते जनता सुखी थी। कलिंग युद्ध मे उन्हें विजय तो मिली लेकिन भारी नरसंहार देखकर उनका मन व्यथित हो गया और बुद्ध के शरण मे आ गए और तथागत की शांति अहिंसा व सत्य के उपदेशों का विश्व में प्रसार किया। मुख्यवक्ता एसोसिएट प्रोफेसर बुद्ध पी जी कॉलेज कुशीनगर डॉ निगम मौर्य ने कहा कि किसी समाज व राष्ट्र की समृद्ध विरासत उसे प्रेरित भी करती हैऔर बेहतर कर दिखाने की चुनौती भी देती है। यह राष्ट्र ही नही सम्पूर्ण विश्व चक्रवर्ती सम्राट अशोक मौर्य का ऋणी है जिन्होंने संसार को धम्म विजय जैसा विचार दिया। भारत के इतिहास में एक से बढ़कर एक प्रतापी राजा हुए है लेकिन चक्रवर्ती सम्राट अशोक इन सबमें ध्रुव तारे की तरह अलग चमक व स्थान रखते हैं। देश के सबसे बड़े भूभाग पर शासन करने के बावजूद अपने प्रजा के कल्याण के लिए सड़क, अस्पताल, सराय, पोखरे व नहर खुदवाए। आपने बौद्ध धर्म में दीक्षित होने के बाद भी सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता की नीति अपनाई। आपके शासन क्षेत्र की विशालता, कुशल प्रशासन व उदारता की गवाही आपके शासन काल के बनवाये गए शिलालेख खुद देते है। आपने विदेशों में अपने दूत ही नही भेजे बल्कि मानवीय आधार पर राशन, दवाएं और वैद्य भी भेजे। आज से 2500 साल पहले इस तरह की बात सोचना व करना अत्यंत विस्मयकारी और अद्वितीय है। जयंती श्रीलंका बुद्ध विहार में आयोजित की गई।

इससे पूर्व भिक्षुओं व श्रद्धालुओं ने धम्म पाठ के बीच बुद्ध व अशोक स्तूप का पूजन, वंदन किया और विश्व शांति की कामना की। अध्यक्षता नथुनी कुशवाहा व आभार डॉ भिक्षु नंद रतन थेरो ने व्यक्त किये। इस दौरान भन्ते अशोक, भन्ते विनय कीर्ति, भन्ते सागर, भन्ते मुलायम, रामेश्वर कुशवाहा, दिनेश चौधरी, जय सिंह सैंथवार, लल्लन मौर्य देवरिया, शारदा प्रसाद, उमा कुशवाहा, राजकुमारी सिंह, सत्यनारायण कुशवाहा, राजाराम कुशवाहा, ब्रजेश कुशवाहा, कमलेश कुशवाहा, प्रभुनाथ सिंह, ओमप्रकाश कुशवाहा, आमोद सिंह, राधेश्याम सिंह सहित बौद्ध भिक्षु व श्रद्धालु मौजूद रहे।

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