हेतिमपुर/कसया । शरदीय नवरात्र का पर्व सोमवार से शुरू हो गया । सोमवार के सुबह से ही श्रंधालु मां के दरबार में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे है । कसया तहसील क्षेत्र के माँ मैनपुर कोटेश्वरी के मंदिर में नवरात्र के पहले दिन सोमवार को दर्शन करने के लिये भोर में 4 बजे से ही भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं थी। दूसरे दिन भी हजारो की संख्या में श्रद्धालु पहुच कर पूजा अर्चना किये। जय माता जी के नारो से पूरा वातावरण भक्ति मय हो गया। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर से 12 किमी पूरब-उत्तर दिशा में खौवा व बाड़ी नदी के बीच स्थित मैनपुर कोट मंदिर से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है। यह एक आध्यात्मिक व पौराणिक स्थल के रूप में सर्वमान्य है। यहां बारहों महीने श्रद्धालुओं के आने-जाने का सिलसिला चलता रहता है। स्थानीय लोगों के साथ साथ बिहार और अन्य प्रांतों के श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र होने के नाते नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं का भीड़ लगा रहता है। इस सिद्ध स्थल का उल्लेख श्रीलंका के बौद्ध ग्रंथ दीपवंश में भी है।
बंजारों की कुल देवी थीं भगवती । बेतों के घने जंगल से घिरे इस क्षेत्र में आसपास बंजारों की आबादी थी। वे मैनपुर की भगवती को अपना कुल देवी मानते थे। बंजारे यहां पूजन-अर्चन करते और माता का आशीष लेते थे। बीसवीं शताब्दी तक यहां बंजारों का निवास था। बंजारे इस देवी को कुलदेवी के रूप में पूजते रहे। आज भी आसपास मौजूद बेंत इसकी गवाही देते हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिये कसया एसएचओ डॉक्टर आशुतोष कुमार त्रिपाठी के द्वारा दो महिला व पुरुष कांस्टेबलो की ड्यूटी लगा रहा जिसमे कांस्टेबल शैलेंद्र पटेल,जानसन,पूनम,गौरी थे ।
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