कुशीनगर। कभी -कभी ऐसा कुछ देखने – सुनने को मिल जाता है,जो चर्चाओं का साथ -साथ मीडिया के लिये खबर हो जाता है।चूंकि सम्बेदना आज के दौर में दफन हो चुकी है। इस लिये कई बार गीत के नाद भी अपना असर खो देते है। दुर्लभ प्रजाति के जीव के भाव को समझने के लिये जय शंकर प्रसाद की ये रचना समीचीन है की अभिलाषाओं की करवट,फिर सुप्त ब्यथा को जगना, सुख का सपना हो जाना,भींगी फ्लको का लगना। यह भाव रहा कुशीनगर जनपद के पुलिस अधीक्षक सचिन्द्र पटेल के वाचक निरीक्षक गिरजेश तिवारी का !
हुआ यह की मंगलवार को जनपद कुशीनगर के पुलिस कार्यालय परिसर में एक दुर्लभ प्रजाति का उलूक (उल्लू) असहाय अवस्था में गिरा हुआ मिला जिसको वाचक पुलिस अधीक्षक कुशीनगर निरीक्षक गिरजेश तिवारी द्वारा रेस्क्यू करते हुए उचित उपचार एवं देखरेख हेतु वन विभाग की टीम को सकुशल सुपूर्द कर दूलर्भ प्रजाति के वन्य जीवों के संरक्षण में सराहनीय योगदान करते हुए अपने मानवीय पहलु का परिचय दिया गया।
बहरहाल अगर खाकी की यह मानवीय चेहरा सुनने -देखने को मिले तो चर्चाएं आम होना स्वभाविक हो जाती है। लेकिन यहाँ कहना लाजमी होगा की जैसा घर का मुखिया जैसा होता है, उसके सदस्य भी वैसे ही होते है। जनपद के पुलिस विभाग के मुखिया सचिन्द्र पटेल के इस निरीक्षक को वन्य जीव के प्रति सम्बेदना काफी तारीफ के काबिल है ही, शाबाश ! गिरजेश।
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