पडरौना/कुशीनगर । नागपंचमी का त्योहार मंगलवार को जनपद के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों मे पारंपरिक तरीके से श्रद्धा और भक्ति से मनाया गया। नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में नागदेव का विशेष पूजा-अर्चन की गई।नागदेव को दूध और लावा चढ़ाकर घर घर पूजा गया। घरों को साफ-सुथरा कर चारों तरफ गोबर से घेरा गया। इसके बाद प्रवेश द्वार पर नाग-नागिन की आकृतियां बनाकर उनकी विशेष पूजा की गई।
काबिलेगौर है कि भारतीय संस्कृति में नागपंचमी का बड़ा महत्व है। सनातन धर्म में नाग पंचमी से ही अन्य त्योहार प्रारंभ होता हैं। नागदेव को सूर्य और शक्ति का अवतार माना गया है। नागपंचमी के दिन सर्प देखना शुभ माना जाता है। नागपंचमी के अवसर पर मंगलवार को घर-घर में नागदेव की पूजा की गई। लोगों ने घरों और मंदिरों में जाकर नागदेवता को दूध-लावा चढ़ाकर नागदोष से मुक्ति पाने के लिए व सुख-समृद्घि की कामना की। कई गांवों में युवाओं ने कबड्डी, कुश्ती समेत अन्य खेलों का भी आयोजन किया। नागपंचमी के त्योहार पर महिलाओं ने नागदेवता को कटहल के पत्ते पर दूध और लावा चढ़ाकर नागदेवता की पूजा की। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि नागपंचमी पर नागदेव की पूजा करने से घर के अंदर सर्प प्रवेश नहीं करते हैं। इसके अलावा सर्पदंश से होने वाली अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है। सिंदुरिया बुजुर्ग, मोगलपुरा धार, मठिया, गगलवा, सपहीं बुजुर्ग, देवरिया वृत, जवार भैंसहा, अमरवा, करमैनी, खलवापट्टी आदि गांव में लोगों ने नागदेवता की पूजा की। नागपंचमी पर शिवमंदिरों में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। भगवान शिव और नागराज को दूध लावा चढ़ाकर पूजा की। पडरौना नगर समेत क्षेत्र सिधुआं स्थान,सुखपुरा गांव के लौंगपुरा आदि गांवों में नागदेवता को दूध पऔर लावा चढ़ाकर नागदेवता की पूजा की।
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