रामकोला/कुशीनगर। श्रीमद्भागवत कथा भगवान के प्रति प्रीति बढ़ाती है।रामकोला नगर के जनता इंटर कालेज वार्ड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के नौवें दिन कथा श्रवण के महत्व का प्रतिपादन करते हुए बनारस से पहुंचे विद्वान आचार्य विवेकानंद शास्त्री ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस कथा का श्रवण करने के लिए देवता भी अमृत कलश लेकर पधारे थे। इस सनातन ग्रंथ में सत्य स्वरूप योगेश्वर श्रीकृष्ण का वर्णन है।
कथा वाचक शास्त्री जी ने शुकदेव परीक्षित संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि समीक ऋषि के आश्रम में पहुंचे राजा परीक्षित को प्यास बुझाने के लिए पानी नही मिली तो अपना अपमान समझ कर राजा ने एक मरा हुआ सर्प उठाया और समीक ऋषि के गले में डाल दिया। यह सूचना पास में खेल रहे बच्चों ने समीक ऋषि के पुत्र को दी।ऋषि के पुत्र ने राजा को श्राप दे दी। 
समीक ऋषि ने जब अपनी दिव्य दृष्टि से देखा कि यह तो महान धर्मात्मा राजा परीक्षित है और यह अपराध इन्होंने कलियुग के वशीभूत होकर किया है तो समीक ऋषि ने यह सूचना जाकर परीक्षित महाराज को दी कि आज से सातवें दिन तक्षक नामक सर्प पक्षी तुम्हें जलाकर नष्ट कर देगा। यह सुनकर परीक्षित महाराज दुखी नहीं हुए और अपना राज्य अपने पुत्र जन्मेजय को सौंपकर गंगा नदी के तट पर पहुंचे। वहां पर बड़े- बड़े ऋषि, मुनि, देवता आ पहुंचे थे और अंत में व्यास नंदन शुकदेव वहां पर पहुंचे। शुकदेव को देखकर सभी ने खड़े होकर शुकदेव जी का स्वागत किया। शुकदेव जी ने भागवत कथा का श्रवण कराई और राजा परीक्षित को श्राप से मुक्ति मिली।कथावाचक ने श्रीमद्भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि यह मोक्षदायिनी अलौकिक कथा हमें विकारों से मुक्ति का मार्ग दिखाती है।
कथा के दौरान कथावाचक ने श्रोताओं को अपने अमृतमयी वाणी से कथा का रसपान कराते रहे और श्रोता मंत्र मुग्ध होते रहे।इस दौरान बृजेश सिंह उर्फ मामा, मंजू सिंह, आभा मल्ल, उमेश मल्ल,कमलेश कुशवाहा, रत्नेश मल्ल, अजीत सिंह,भोला सिंह, सहित काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कुशीनगर ब्यूरो: भीषण गर्मी और नौतपा के तीखे तेवरों के बीच उत्तर प्रदेश के…
कुशीनगर । नेपाल के नागरिकों को नौकरी, उच्च शिक्षा और नेटवर्क मार्केटिंग के माध्यम…
कुशीनगर। जनपद के तमकुहीराज क्षेत्र स्थित सलेमगढ़ टोल प्लाजा पर बीते रात उस समय…
कुशीनगर। जनपद के अहिरौली बाजार थाना क्षेत्र के बरडीहा गांव में बीएसएनएल टावर के…