अहिरौली बाजार क्षेत्र के गोपाला में चल रहे सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के अन्तिम दिवस में कथावाचक अंशुमानचार्य ने श्रोताओं को कथा का रसपान कराते हैं मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि जहां भी हो रही हो कोई भी करा रहा हो कथा को सुनने जाना चाहिए।
जगह नहीं मिलने पर आप दूर स्थान जहां कथा की आवाज आ रही है। वहां बैठकर श्रवण करना चाहिए। सुख दुख इस संसार में भुगतना है। इसलिए सुख के प्रति और धर्म दान करते रहना चाहिए। यही आपके जीवन में काम आएगा। कभी भी अपने आप पर अहंकार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कलयुग में नाम स्मरण करने से भगवान कष्ट दूर कर देते हैं। श्रीमद् भागवत कथा को सुनने से नहीं, जीवन में आत्मसात करने से जीवन कल्याण के मार्ग प्रशस्त होगा।भागवत कथा श्रवण करने से मनुष्य के कई जन्मों का पापों का नाश हो जाता है। हमें भागवत कथा सुनने के साथ उसकी शिक्षाओं पर भी जीवन में आत्मसात करना चाहिए। कृष्ण अवतार के रूप में विष्णु ने संसार को यह संदेश दिया कि नैतिक शिक्षा और कर्तव्य के माध्यम से जीवन में सफलता को प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए कि जीवन में परोपकार करो। उन्होंने कहा कि अहंकार से मुक्त होने पर ही मनुष्य ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। अहंकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता है।
महाराज ने कहा कि भागवत में तीनों कालों का उल्लेख है भागवत कथा का श्रवण करने से हर प्रश्न का उत्तर मिलता है। हर समस्या का समाधान मिलता है उन्होंने गोकर्ण द्वारा अजामिल की मुक्ति जैसे विभिन्न प्रसंगों का विस्तार से वर्णन प्रस्तुत किया।
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