इस समय में अगर सरसों के तेल को आप परफ्यूम की उपाधि देते हैं तो यह बिल्कुल सूट करता है. जिस तरह हम परफ्यूम की दो-चार बूंद छिड़ककर उसकी खुशबू लेते हैं उसी तरह अब सरसोंं के तेल की एक बॉटल ले आइए और अनुलोम-विलोम कीजिए तब जाकर इसकी खुशबू आप तक पहुंचेगी..
अब परफ्यूम की स्मेल तो काफी स्ट्रांग होती है. दो बूंद लगाते से ही पूरे रूम में महक फैल जाती है और दिन भर कपड़े से आप खुशबू लेते रहते हैं. परफ्यूम को हम ज्यादा इस्तेमाल भी नहीं करते. अब अगर सरसों की बात की जाए तो जब बच्चे का जन्म होता है तब से उसे सरसों तेल की आदत हो जाती है. इसलिए सरसों तेल की खुशबू लेने के लिए एकदम रामदेव की तरह सांस खींचिए.
जिस तरह सरसों का तेल (जिसे कड़वा तेल भी कहा जाता है) का दाम आसमान छू रहा है, यही हिसाब रहा तो कोई खाने में तेल डालेगा नहीं बल्कि तेल के डिब्बे को खाने के टेबल या किचन में रखेगा और देखकर खुश होगा. यह सोचकर संतोष करेगा कि हमारे घर में सरसों का तेल है. भाई जब सरसों का तेल 224 रूपए प्रति लीटर मिल रहा है तो यही करना पड़ेगा ना? अब तो लोगों के घर में सरसों का तेल होना एक प्रतिष्ठा की बात हो जाएगी.
भइया आज ही मस्टराईन बता रही थीं कि आज लॉकडाउन खुला तो मास्टर जी कहे कि बताओ का-का सामान लाना है. बहुत दिन हो गए किराने का सामान नहीं लाए. रसोई में तुम्हारा कोई जवाब नहीं है, लिस्ट बनाओ और आज रात खाने में कुछ पकवान बन जाता तो मजा आ जाता. मास्टर जी गए थे बाजार, उधर से आए तो गुस्से में टमाटर की तरह लाल.
मस्टराईन को लगा कि किसी से लड़ के आए होंगे. पूछने पर वे मस्टराइन पर ही चिल्ला पड़े कि, महीने में तुमको 5 लीटर सरसों का तेल खपत करने की का जरूरत है. मंहगाई के मारे तेल का दाम आसमान छू रहा है और तुम सब्जी में भर-भर के तेल डालती फिर रही हो. मस्टराईन भी तमतमताएं बोल पड़ी, आप ही को तो तैरते हुए तेल वाली सब्जी खानी होती है. कभी पकौड़ा तो कभी कचौरी.
मास्टर जी बोले तो ठीक है अब सिर्फ 2 लीटर तेल लाएं हैं, सब्जी में अब तेल कम डालना और पूरा महीना चलाना. मस्टराईन भी तपाक से बोल पड़ीं, हां पानी में छौंक कर दे देंगे, खा लेना बस. अब सुबह से दोनों में बातचीत बंद हैं. अब काहे का पकवान और काहे की पूरी.
अक्सर रिक्शा वाले और मजदूर दिन भर काम करने के बाद 100-200 कमाते हैं. उसमें से वे कुछ बचाते हैं और शाम को 50 रुपए में 10 का आटा और 10 रुपए का तेल और नमक मिर्च से खरीद कर कहीं भी रोटी बनाकर खा लेते हैं. सोचिए अब जब वे 10 रूपए का तेल मांगेंगे तो उन्हें क्या आई ड्रॉप जैसे नहीं मिलेगा. वो भी दुकान वाले दयावान निकला तो वरना भगा भी सकता है.
माफ कीजिए, हम यहां पैसों वाले लोगों की बात नहीं कर रहे. हम यहां उन लोगों की बात कर रहे जो भारत की पहचान हैं. एक मिडिल क्लास परिवार, जिसमें असली भारत बसता है. जिन्हें डाइट के नाम पर टाइम से रोटी मिल जाना चाहिए बस. उन्हें नहीं पता कि कीटो डाइट क्या है.
आलम यह है कि घर में कोई भाई-भाई में तेल को लेकर लड़ाई हो रही है. लोग अपना-अपना डिब्बा खरीद कर ला रहे हैं और हिसाब रख रहे हैं कि मेरा वाला तेल किसी ने इस्तेमाल तो नहीं किया. अगर कोई घर में सरसों के तेल से माउथ पुलिंग करता दिख जाए तब तो संग्राम होना तय है. बालों में तेल लगाने वाली बहन झल्का कर बोल सकती है कि, यहां लगाने को नहीं है और तुम मुंह में कुल्ली करके नुकसान कर रहे हो. शुद्ध तेल से कुल्ला करने का इतना ही शौक है तो पानी से कर लो.
अगर आलम यही रहा तो वो दिन दूर नहीं जब तेल बचाओ अभियान की शुरूआत हो जाए. लोग उबला खाने लगे लेकिन इस खाने को आप सेहत से जोड़कर ज्ञान देने की गलती मत कीजिएगा, क्योंकि जो 220 रुपए लीटर तेल खरीद कर लाएगा उसका दिमाग पहले से ही गर्म होगा. खासकर तब जब सब्सिडी के नाम पर पहले से ही 65 रुपए आ रहे हैं. इसलिए सरसों के तेल को बस दूर से देखिए और खुश रहिए.eng
कुशीनगर। अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में विशुनपुरा पुलिस ने एक बड़ी…
कुशीनगर। जनपद में अवैध शराब के खिलाफ चल रहे सख्त अभियान के बीच कसया…
कुशीनगर। तेजी से बढ़ती डिजिटल दुनिया के बीच साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे को…
बोदरवार, कुशीनगर :- घर के इकलौते पुत्र की मौत होने की जानकारी होते ही…