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UP: इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला- जन्म तिथि के निर्धारण में हाईस्कूल का प्रमाणपत्र आधार और पैन से अधिक मान्य, पढ़े क्या है मामला!

न्यूज अड्डा डेस्क

Reported By:

Aug 12, 2021  |  12:36 PM

1,380 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
UP: इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला- जन्म तिथि के निर्धारण में हाईस्कूल का प्रमाणपत्र आधार और पैन से अधिक मान्य, पढ़े क्या है मामला!

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जन्म तिथि निर्धारित करने के मामले में बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने डेट ऑफ बर्थ निर्धारण में हाई स्कूल प्रमाणपत्र को सर्वाधिक मान्य दस्तावेज करार दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर हाईस्कूल का प्रमाणपत्र उपलब्ध है, तो आधार कार्ड, पैन कार्ड या मेडिको लीगल जांच रिपोर्ट पर विचार करने की कोई जरूरत नहीं है। यह आदेश जस्टिस आरआर अग्रवाल ने एक याचिका पर दिया है।

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पैन-आधार में दर्ज जन्मतिथि विचारणीय नहीं

कोर्ट ने आगे कहा कि अगर हाई स्कूल प्रमाणपत्र में दर्ज जन्मतिथि पर आपत्ति की गई है या उसकी विश्वसनीयता पर सवाल हैं तो ऐसे हाल में स्थानीय निकाय द्वारा जारी दस्तावेज ही मान्य होगा। अगर स्थानीय निकाय द्वारा जारी दस्तावेज नहीं है तो मेडिकल जांच रिपोर्ट स्वीकार की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड, पैन कार्ड में दर्ज जन्मतिथि पर आयु निर्धारण विचारणीय नहीं है।

हाईस्कूल के प्रमाण पत्र पर अविश्वास नहीं किया जा सकता

कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड, पैन कार्ड व मेडिकल जांच रिपोर्ट में आयु भिन्न होने के कारण हाई स्कूल प्रमाणपत्र पर अविश्वास नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने द्वितीय याची के शादी के समय नाबालिग होने के कारण संरक्षण देने से इनकार कर दिया है और याचिका खारिज कर दी है।

याची का कहना था कि आधार कार्ड, पैन कार्ड में दर्ज जन्म तिथि से लड़की और लड़का बालिग हैं। भारत के संविधान द्वारा दिए गए स्वतंत्रता के मूल अधिकार के तहत किसी को उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। उसकी मांग थी कि इसके वैवाहिक जीवन में घर वालों को हस्तक्षेप को रोका जाए।

लड़की की मां ने एफआईआर दर्ज कराई थी और याची पर नाबालिग लड़की का अपहरण करने का आरोप लगाया है। मां की तरफ से अधिवक्ता का कहना था कि प्रथम याची के खिलाफ विभिन्न थानों में गैंग्स्टर एक्ट सहित चार आपराधिक केस दर्ज हैं। वह आपराधिक प्रकृति का व्यक्ति है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों व कानून से स्पष्ट है कि जब हाई स्कूल प्रमाणपत्र है तो जन्म तिथि निर्धारित करने के लिए अन्य किसी दस्तावेज को स्वीकार नहीं किया जाएगा। द्वितीय याची ने हाई स्कूल प्रमाणपत्र पर दर्ज जन्म तिथि पर कोई आपत्ति नहीं की है। हाई स्कूल प्रमाणपत्र के अनुसार द्वितीय याची की आयु शादी के समय 17 साल थी, इसलिए याचिका खारिज की जाए।

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