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जी! यहाँ पूर्वांचल में-बिकते हैं ‘मरीज’, खरीदार लगाते हैं बोली!

न्यूज अड्डा डेस्क

Reported By:

Mar 19, 2021  |  5:27 PM

1,130 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
जी! यहाँ पूर्वांचल में-बिकते हैं ‘मरीज’, खरीदार लगाते हैं बोली!

पवित्र पेशा औऱ भगवान का रूप माने जाने वाले चिकित्स्क भी कुछ लोगो के वजह से लोगो के निगाह में अब कटघरे में देखें जाने लगे है। भोली -भाली आम बीमारियों से पीड़ित परिजनो को इलाज के नाम पर खरीद-फरोख्त की बोली लगने लगीं है। उत्तरप्रदेश- बिहार सीमावर्ती के ज्यादे लोग गोरखपुर में ही आते है ।इलाज के लिए बिहार या यूपी के दूसरे शहरों से आने वाले मरीजों को बरगला कर कुछ निजी एंबुलेंस चालक और बिचौलिए अच्छे दामों पर कुछ निजी अस्पतालों को ‘बेच’ रहे हैं। इन अस्पतालों में इलाज के नाम पर मनमानी वसूली की जाती है। इसी लूट से अस्पताल प्रबंधन बिचौलियों और एंबुलेंस चालकों को मोटा कमीशन दे रहे हैं। एक गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस चालक को 45-50 हजार रुपये तक का मोटा कमीशन मिलने की बात सामने आई है। सामान्य मरीजों को भर्ती कराने पर 25-30 हजार रुपये तक मिल जाते हैं।

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कमीशनबाजी के इस धंधे से आईएमए के पदाधिकारी भी चिंतित हैं। अब आईएमए ही कमीशनबाजी के आरोपों से चिकित्सा के पेशे को बचाना चाहता है। इस गठजोड़ की मीडिया ने पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि कुछ निजी अस्पताल बिचौलिए व एंबुलेंस चालकों के सहारे ही चल रहे हैं। ये मरीज व उनके परिजनों को फंसाकर लाते हैं, फिर मोटा कमीशन लेते हैं।

पड़ताल के मुताबिक जिले में एंबुलेंस चालकों और कुछ निजी अस्पताल संचालकों व डॉक्टरों के बीच गठजोड़ बेहद मजबूत है। इनके नेटवर्क को न तो स्वास्थ्य विभाग तोड़ पा रहा और न इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर की इकाई। इनको चिकित्सा के पवित्र पेशे में गंदगी की जानकारी है, फिर भी वे कुछ नहीं कर पा रहे हैं। हाल के दिनों में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सामने से एक मरीज को बरगला कर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसकी सूचना पर एडीएम फाइनेंस राजेश कुमार सिंह व ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह की टीम ने कार्रवाई की थी। निजी अस्पताल में भर्ती मरीज को पहले बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था।

यह है- इनके मजबूत नेटवर्क

निजी अस्पतालों व दलालों का नेटवर्क सबसे ज्यादा जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आसपास फैला है। जैसे ही मरीज गेट पर पहुंचता है, वैसे ही निजी एंबुलेंस चालक सक्रिय हो जाते हैं और मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराने के प्रयास में जुट जाते हैं। परेशान मरीज या उसके परिजनों को बरगला कर निजी अस्पताल ले जाते हैं, फिर शुरू होता है पैसा जमा कराने का सिलसिला।

यह मरीजों होते हैं नेटवर्क का निशाना

आप भी जानिये! इस नेटवर्क से जुड़े बिचौलिए देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बिहार, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर और नेपाल से आने वाले मरीजों को निशाना बनाते हैं।

यहाँ है-बिचौलियों की सक्रियता

सिद्धार्थनगर, महराजगंज और नेपाल से आने वाले मरीजों को गोरखनाथ क्षेत्र के आसपास के इलाकों के निजी अस्पतालों में ले जाया जाता है। इस क्षेत्र में निजी एंबुलेंस चालकों के साथ ही कुछ ऑटो व टेंपो चालकों का मजबूत नेटवर्क बना हुआ है। ऑटो, टैंपो में मरीज व उनके परिजन जैसे ही बैठते हैं, वैसे ही निजी अस्पताल के डॉक्टरों का गुणगान शुरू हो जाता है। यह गुणगान निजी अस्पताल में मरीज को पहुंचाने के बाद ही समाप्त होता है। यही नहीं बिचौलिए निजी अस्पतालों के निदेशक बनकर बात करते हैं। कहते हैं कि जाकर डॉक्टर साहब से मिल लीजिए। बता दीजिए डायरेक्टर साहब ने भेजा है।

फुटहवा इनार के पास रहता है जमावड़ा

देवरिया की तरफ से आने वाले मरीजों के लिए बिचौलिए फुटहवा इनार के आसपास जमावड़ा लगाते हैं। इनकी एंबुलेंस चालकों से दोस्ती होती है। जैसे ही एंबुलेंस दिखती है, वैसे ही हाथ देकर बिचौलिए आगे की सीट पर सवार हो जाते हैं। एंबुलेंस में बैठने के बाद सरकारी अस्पतालों व डॉक्टरों की लापरवाही बताई जाती है। परेशान मरीज या उनके परिजनों को विश्वास दिलाया जाता है कि कुछ निजी अस्पतालों में बढ़िया चिकित्सक हैं। इस झांसे में मरीज के परिजन आ भी जाते हैं। यह ‘खेल’ तब खुला, जब एक मरीज को आईएमए के पदाधिकारी को दिखाने के लिए भेजा गया था। इस मरीज को फुटहवा इनार से ही हाईजैक करके तारामंडल क्षेत्र के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। मरीज से कहा गया था कि आईएमए के जिस पदाधिकारी के यहां आप जा रहे हो, वहां कई मरीजों की मौत हो चुकी है। दो दिन में ही मरीज के परिजनों की जेब खाली हो जाती है। फिर उन्हें आईएमए के पदाधिकारी की याद आती है। मरीज डिस्चार्ज कराके पदाधिकारी के पास पहुंचते हैं और आपबीती सुनाते हैं।

इन मार्गो पर रहती है निगरानी

कुशीनगर और बिहार की तरफ से आने वाले मरीजों को जगदीशपुर रोड, महराजगंज की तरफ से आने वाले मरीजों को भटहट व कैंपियरगंज के पास हाईजैक किया जाता है। खास बात यह है कि एंबुलेंस के नंबर के आधार पर वह कुछ ही देर में मरीज व ड्राइवर का डिटेल पता कर लेते हैं। फोन पर उनसे सारी डीलिंग होती है। जो संचालक ज्यादा रेट देता है, मरीज उसके अस्पताल में पहुंचा दिए जाते हैं।

एंबुलेंस चालक ने बरगलाकर भर्ती कराया था मरीज  

कुशीनगर निवासी मरीज को न्यू लोटस हॉस्पिटल में एंबुलेंस चालकों ने ही पहुंचाया था। पीड़ित मरीज बीआरडी मेडिकल कॉलेज इलाज कराने पहुंचा था। मेडिकल कॉलेज के बाहर मौजूद एंबुलेंस चालक ने बरगला कर निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया था। इससे पूर्व भी एक अधिकारी के चालक ने भी अपने एक रिश्तेदार को हॉस्पिटल में भर्ती कराया था, जहां पर मोटी रकम वसूली गई थी।

आईएमए के रडार पर हैं 30 निजी अस्पताल

आईएमए ने 30 ऐसे अस्पतालों की सूची तैयार की है, जो चिकित्सा के पवित्र पेशे को बदनाम कर रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा अस्पताल तारामंडल व गोरखनाथ क्षेत्र के हैं। जेल रोड, मेडिकल कॉलेज के आसपास, करीम नगर, गोलघर, कसया रोड पर भी में ऐसे अस्पताल हैं, जहां पर कमीशनबाजी से मरीज भर्ती कराए जाते हैं। तारामंडल में दो अस्पताल ऐसे हैं, जिनका संचालन कुछ एंबुलेंस चालक करते हैं। नौसड़ क्षेत्र में खुले एक अस्पताल का संचालक गोरखनाथ क्षेत्र का बिचौलिया बताया जा रहा है। ऐसे अस्पतालों की जांच में आईएमए अब स्वास्थ्य विभाग की मदद भी करेगा।

-सभार-

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