गोरखपुर का एक ऐसा गांव जहां पर है मोरों की बस्ती, 150 से ज्यादा मोर
गोरखपुर. राष्ट्रीय पक्षी मोर (Peacock) के देखने के लिए शहरों में लोगों को चिड़ियाघर जाना पड़ता है. गांवों में अगर बाग-पानी की व्यस्था है तो घंटो इंतजार करना पड़ता है मोर देखने के लिए. वहीं, सीएम सिटी गोरखपुर (Gorakhpur) एक ऐसा गांव है जहां पर लोगों की घरों की छतों, गलियों, खेत खलिहान में मोर नाचते झूमते दिख जाते हैं. जिला मुख्यालय के 10 किलोमीटर दूरी पर स्थित खोराबार ब्लॉक के कोनी गांव को लोग मोर वाले गांव के रूप में भी जानते हैं. यहां पर कोई भी मोर को पिंजड़े में नहीं रखता है. न ही अपने घर में पालता है. फिर भी मोर गांव के आस पास ही रहते हैं. गांव वाले कहते हैं कि अगर कोई मोर गांव से बाहर चला जाता है तो फिर वापस भी लौट आता है.

गांव के हर घर में मोरपंख मिलता है. ग्रामीण कहते हैं कि 1998 में जब गोरखपुर में भीषण बाढ़ आई थी. तब उसी बाढ़ में दो जोड़े मोर गांव में आ गये थे. जिसके बाद गांव वालों उन दोनों को भीषण बाढ़ से बचाने के साथ उनके रहने की व्यवस्था की. जिसके बाद से गांव में ही मोर रहने लगे आज 150 से अधिक मोर गांव में रहते हैं. गांव का कोई भी व्यक्ति मोरों को मार नहीं सकता है. अगर बच्चे किसी मोर को परेशान करते हैं तो ग्रामीण उन बच्चों को भगा देते हैं.
कुशीनगर । गोरखपुर-फैजाबाद खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 के अंतर्गत 23 अक्टूबर…
कुशीनगर। तमकुही रोड रेलवे स्टेशन पर पुरानी रंजिश को लेकर एक युवक पर जानलेवा…
गोरखपुर। डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पंचम दीक्षांत समारोह में…
गोरखपुर। नवरात्र के पावन पर्व पर मां दुर्गा की आराधना के बीच गोरखपुर जंक्शन…