◆श्री रामचंद्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं…।
◆दिपावली के उपलक्ष्य में बोईसर में हुआ सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम.।
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पालघर.।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन, हरण भवभय दारुणं.।
नव कंज लोचन कंज मुख,कर कंज पद कंजारुणं.।।


सुमधुर भक्ति भजन की संगीतमयी वाचन करते सांस्कृतिक संध्या बेला में पुरी तरह संजी सँवरी दीपकों की रोशनी में जगमगाती

औद्योगिक शहर बोईसर (प.) पुरोहित थाल में बने सभागार में दिपावली के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक व सेवाभावी संस्था ओस्तवाल उत्सव महिला मंडल की ओर से आयोजित स्नेहमयी मिलन एवं प्रीतिभोज का अलौकिक अदभूत कार्यक्रम मर्यादा पुरुषोत्तम राम-सीता संग लक्ष्मण हनुमान जी के लंका पर विजय प्राप्त करके धर्मनगरी अयोध्या में शुभागमन पर उनका स्वागत अभिषेक एवं विभिन्न तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों,हास परिहास से भरे स्पर्धाओं के साथ रविवार को देर शाम संपन्न हुआ.।


सांस्कृतिक एवं सेवा भावी संस्था ओस्तवाल उत्सव महिला मंडल की ओर से सर्व प्रथम रामायण के विभिन्न चरित्रों को दर्शाती भगवान श्रीराम समेत चारों भाईयों के जन्म से लेकर अंत में लंकापति रावण के दंभ को विनाश कर अयोध्या में पुनरागमन की नगरवासियों की खुशी की झांकियों की तख्तियां के मनोहारी चित्रण से सभी उपस्थित अतिथियों का परिचय कराया गया.। बीच -बीच में महिला मंडल की ओर से कार्यक्रम में विभिन्न चरित्रों पर भजन,संकीर्तन एवं चौपाईयोँ का भी सुंदर प्रयोग कार्यक्रम को शोभायमान बना रहे थें।


कार्यक्रम में सभी अतिथियों, संबधियों एवं जीवनसंगिनी तथा उनके जीवन साथी का एक दुसरें से परिचय,स्वागत,आभार का सिलसिला भी सभी जनों के लिए बोईसर में पहली बार महिलाओं की ओर से आयोजित हो रही इस प्रकार का अनोखा आकर्षक से परिपूर्ण कार्यक्रम का सभी ने खुब सराहना की.। तरह-तरह के मनोरंजक प्रतियोगिताओं में सहभागी जनों में विजेता एवं उप विजेताओं को ससम्मान पारितोषिक के साथ सभी उपस्थित जनों को स्वादिष्ट प्रीतिभोज के उपरांत उपहार देकर दिपावली एवं नये वर्ष की ढेरों शुभकामनाएं भेंट की गयी.।


सांस्कृतिक एवं सेवा भावी संस्था ओस्तवाल उत्सव महिला मंडल की ओर से सभी उपस्थित जनों का आभार प्रकट करते


मन जाहि राच्यों मिलहिं सो,वर सहज सुंदर सावरोँ।
करुणा निधान सुजान शील,स्नेह जानत रावरो.।।
ऐहि भांति गौरी आशिष सुन सिय सहित हरषित अली.।
तुलसी भवानहि पूजी पुनि-पुनि मुदित मनमंदिर चली.।।
एक दुसरे बहनों से मिलते विदाई दी.।