हाटा कुशीनगर । हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व मकर संक्रांति इस वर्ष 15 जनवरी 2026 को श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 14 जनवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होने के कारण मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी की सुबह से मान्य होगा।
पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी सुबह 7:21 बजे से शाम 5:55 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में स्नान, दान, जप-तप एवं धार्मिक अनुष्ठान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। हालांकि पंचांग भेद के कारण देश के कुछ क्षेत्रों में यह पर्व 14 जनवरी को भी मनाया जाएगा, लेकिन अधिकतर मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर संक्रांति से जुड़े आयोजन, दान-पुण्य और विशेष पूजा 15 जनवरी को ही संपन्न कराए जाएंगे।
ज्योतिषाचार्य पंडित अभिषेक पाठक ने बताया कि आमतौर पर मलमास की अवधि 14 दिसंबर से 14 जनवरी तक मानी जाती है, लेकिन इस वर्ष ज्योतिषीय संयोग के अनुसार 16 दिसंबर को सूर्य ने दोपहर 3:28 बजे धनु राशि में प्रवेश किया था। सूर्य के धनु राशि में रहने की अवधि को ही मलमास कहा जाता है, जो 14 जनवरी की रात तक रहेगा। इस दौरान एक माह तक मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं।
मकर संक्रांति के दिन तिल से बनी वस्तुओं का दान विशेष महत्व रखता है। इसके साथ ही अन्न दान, तीर्थ स्नान और गंगा स्नान को भी अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए दान और स्नान से पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
इस प्रकार धार्मिक परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति 2026 का मुख्य पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा।
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