तुर्कपट्टी/कुशीनगर। तमकुही विकास खंड के ग्राम पंचायत राजापाकड़ के शिवाला टोला मे 120 वर्ष पूर्व स्थापित शिवमंदिर परिसर में वर्ष 1965 से लगने वाले महाशिवारात्रि मेला के निमित्त आयोजित 11 दिवसीय श्री श्री 1008 श्री रामचरित मानस नवाह परायण महायज्ञ के सातवें दिन व कथा प्रवचन के पांचवे दिन शनिवार की सायं अयोध्याधाम से पधारे कथावाचक गायत्री नंदन महाराज ने शिव पार्वती विवाह प्रसंग का वर्णन किया।
कथा वाचक ने कहा कि पर्वत राज हिमालय की घोर तपस्या के बाद उनके घर अवतरित माता पार्वती बचपन से ही बाबा भोलेनाथ की अनन्य भक्त थीं, एक दिन पर्वतराज के घर महर्षि नारद पधारे और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया। इस क्रम में नंदी पर सवार भोलेनाथ जब भूत पिशाचों के साथ बरात लेकर पहुंचे तो उसे देखकर पर्वतराज और उनके परिजन अचंभित हो गए, लेकिन माता पार्वती खुशी से भोलेनाथ को पति के रूप में स्वीकार कर लिया। दिन के सत्र में कथावाचक प्रेमशरण दास ने हनुमान महिमा का बखान किया। इसके पूर्व किन्नर रुबी, किन्नर पायल, किन्नर जूही, वी पैक्स के सचिव संजय शाही, विंध्याचल तिवारी, अजय गुप्ता, प्रदीप यादव आदि ने व्यास पीठ का पूजन कर रामचरित मानस ग्रंथ की आरती उतारी। संचालन पं. दीपक मिश्र ने किया। यज्ञाचार्य पं. राकेश पांडेय के नेतृत्व में यजमानों ने पूजन किया। नवाह परायण का पाठ किया गया। कु. आंचल यादव ने 12 घंटे यज्ञशाला की परिक्रमा की।
इस दौरान आयोजक हरिदास महाराज, यज्ञ समिति के अध्यक्ष राजू यादव, सत्यनारायण यादव, गौरीशंकर गुप्ता, धनन्जय सिंह सोनू, सत्यम मिश्र, देवकी यादव, अरविंद मिश्र, गौरव मिश्र, प्रेमचंद यादव, दूधनाथ यादव, दिनेश मिश्र, राजकुमार पासवान, अमन ठाकुर, मन्ना, लालू, मनीष कुमार आदि मौजूद रहे।
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