कुशीनगर। जनपद के सेवरही विकास खंड अंतर्गत ग्राम सभा हफुआ चर्तुभुज में मनरेगा कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि बरसात शुरू होते ही वर्षों पुराने चकरोडों को रोटावेटर से जुतवाकर उन्हें नया मनरेगा कार्य दर्शाया जाता है और फिर सरकारी धन का लाखों रुपये भुगतान करा लिया जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि एक ही चकरोड को अलग-अलग चौहद्दी दिखाकर बार-बार नया कार्य प्रदर्शित किया जाता है। कागजों में हर बार नया कार्य दर्ज होता है, लेकिन धरातल पर वही पुराना चकरोड दिखाई देता है। आरोप है कि इसी तरीके से सरकारी खजाने को लगातार चूना लगाया जा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, यदि संबंधित कार्यों के अभिलेख, मस्टर रोल, जियो टैगिंग, भुगतान विवरण और मौके का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। उनका दावा है कि जांच होने पर मनरेगा में हुए कथित खेल की कई परतें खुल सकती हैं।
मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य गांवों में रोजगार उपलब्ध कराना और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है। लेकिन यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न सिर्फ सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला होगा, बल्कि योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कुशीनगर से पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने का दावा कर रही है, वहीं इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई होना जरूरी है, ताकि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना भ्रष्टाचार का माध्यम नहीं, बल्कि विकास का आधार बनी रहे।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। यदि निष्पक्ष जांच होती है तो “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा और यदि आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई तय मानी जाएगी।
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