गोरखपुर। रेलवे स्टेशन पर यात्री बनकर घूमना, भोले-भाले यात्रियों से दोस्ती गांठना, बातचीत में भरोसे में लेना और फिर चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर बेहोश कर सामान लेकर चंपत हो जाना—जहरखुरानी का यह पुराना और शातिर खेल खेलने वाला हिस्ट्रीशीटर आखिरकार जीआरपी के शिकंजे में आ गया। गोरखपुर जंक्शन पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे अभियान के दौरान प्रभारी निरीक्षक अनुज कुमार सिंह के नेतृत्व में एंटी जहरखुरानी टीम ने 55 वर्षीय शातिर महेंद्र गिरी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के कब्जे से चोरी का एक एंड्रॉयड मोबाइल, ट्रॉली बैग, सफेद धातु की चेन और चार हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। बरामद सामान की कुल कीमत करीब 55 हजार रुपये बताई गई है। आरोपी के खिलाफ गोरखपुर और देवरिया जीआरपी में जहरखुरानी, चोरी, गैंगस्टर एक्ट और एनडीपीएस एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज हैं। वह थाना गौरीबाजार, देवरिया का हिस्ट्रीशीटर और अभ्यस्त अपराधी है।
रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में चोरी एवं जहरखुरानी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए विशेष निगरानी की जा रही है।
इसी क्रम में प्रभारी निरीक्षक अनुज कुमार सिंह के नेतृत्व में उपनिरीक्षक दिग्विजय सिंह परमार, उपनिरीक्षक अरविन्द कुमार और एंटी जहरखुरानी टीम सादे कपड़ों में संदिग्धों पर नजर रख रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि एक शातिर जहरखुरान चोरी के सामान के साथ गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर मौजूद है।
सूचना मिलते ही टीम ने प्लेटफार्म नंबर एक स्थित यात्री हाल के पास घेराबंदी कर महेंद्र गिरी पुत्र स्व. रामबिलास गिरी, निवासी जंगलकिता सेम इंदुपुर, थाना गौरीबाजार, जनपद देवरिया को पकड़ लिया।
तलाशी के दौरान उसके पास से एक चोरी का एंड्रॉयड मोबाइल, एक ट्रॉली बैग, सफेद धातु की एक चेन और चार हजार रुपये नकद बरामद हुए।
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस के सामने अपने अपराध करने का तरीका बताया। पुलिस के मुताबिक महेंद्र गिरी रेलवे स्टेशन पर अकेले और भोले-भाले यात्रियों को बातचीत के जरिए पहचानता था। पहले उनसे दोस्ती करता, फिर चाय-पानी कराकर विश्वास जीतता था।
इसके बाद वह अपनी लाई हुई चाय में नशीली दवा मिलाकर यात्री को पिला देता था। यात्री के बेहोश होते ही उसका मोबाइल, नकदी, बैग और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो जाता था।
शातिर इतना सतर्क रहता था कि वारदात के बाद पहचान से बचने के लिए अपने झोले में दूसरे कपड़े भी रखता था। घटना को अंजाम देने के बाद वह कपड़े बदलकर मौके से निकल जाता था।
पुलिस के अनुसार आरोपी कभी-कभी ट्रेनों में सफर कर यात्रियों के ट्रॉली बैग और अन्य सामान पर भी हाथ साफ करता था।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि सोमवार को भी वह चोरी किए गए सामान को बेचने के लिए ट्रेन पकड़ने गोरखपुर स्टेशन आया था। लेकिन इससे पहले कि वह अपने मंसूबे में कामयाब होता, प्रभारी निरीक्षक अनुज कुमार सिंह की टीम ने उसे दबोच लिया।
पुलिस ने बरामदगी को जीआरपी गोरखपुर में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 101/2026, 128/2026 और 136/2026 से संबंधित पाया। संबंधित मुकदमों में बीएनएस की धारा 317(2) और 317(4) की बढ़ोतरी की गई है।
2003 से अपराध की दुनिया में सक्रिय
पुलिस के मुताबिक महेंद्र गिरी ने वर्ष 2003 में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। उसका पहला मामला जीआरपी गोरखपुर में डकैती की तैयारी से संबंधित मुकदमा अपराध संख्या 445/03 के रूप में दर्ज हुआ। इसके बाद उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और एनडीपीएस एक्ट समेत कई मामले दर्ज होते गए।
यहां बताना चाहूंगा कि
वर्ष 2017 में गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर जहरखुरानी की दो घटनाओं में भी उसका नाम सामने आया था। दोनों मामलों में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा गया था। जेल से बाहर आने के बाद भी उसने अपराध का रास्ता नहीं छोड़ा। वर्ष 2025 में भी उसके खिलाफ जीआरपी देवरिया में एनडीपीएस एक्ट और बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। वहीं वर्ष 2026 में गोरखपुर जीआरपी में चोरी से जुड़े तीन मुकदमों में उसकी संलिप्तता सामने आई है। महेंद्र गिरी के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में जहरखुरानी, चोरी, चोरी का माल रखने व बेचने, डकैती की तैयारी, गैंगस्टर एक्ट तथा मादक पदार्थों की तस्करी जैसे मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ वर्ष 2003 से लेकर 2026 तक कई अभियोग दर्ज हो चुके हैं।
प्रभारी निरीक्षक अनुज सिंह की टीम ने खोली शातिर की पोल..!
गोरखपुर जंक्शन पर जहरखुरानी और चोरी की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए जीआरपी की एंटी जहरखुरानी टीम लगातार सक्रिय है। प्रभारी निरीक्षक अनुज कुमार सिंह के नेतृत्व में सादे कपड़ों में की जा रही निगरानी और मुखबिर तंत्र की सक्रियता के चलते यह गिरफ्तारी संभव हुई।
गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेज दिया गया।
गिरफ्तार करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक अनुज कुमार सिंह, उपनिरीक्षक दिग्विजय सिंह परमार, उपनिरीक्षक अरविन्द कुमार, हेड कांस्टेबल आशुतोष मिश्रा, हेड कांस्टेबल गुरुप्रसाद कन्नौजिया, कांस्टेबल विपिन यादव, रणजीत यादव, देवेन्द्र यादव और अविनीश सिंह शामिल रहे।
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