हाटा/कुशीनगर। हिंदी भाषा भारत की जातिय परम्परा और बोध की भाषा है यह भाषा हमें हमारी स्मृति परम्परा और इतिहास की बोध कराती हैं उक्त बातें बुद्ववार को ढाढा स्थित राजकीय महाविद्यालय पर हिंदी दिवस पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम पर हिंदी विभाग के बिभागाध्यक्ष प्रो डा०अभिषेक कुमार मिश्र ने कही।
प्रो श्री मिश्र ने कहा कि प्रसिद्ध विद्वान समीक्षक राम बिलास शर्मा ने हिंदी जाति की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए उसके मध्यकाल से लेकर आधुनिक काल तक सामाजिक राजनीतिक तथा आर्थिक और सांस्कृतिक परिपेक्ष्य में समग्र राष्ट्र के भीतर हिंदी के सहज स्वाभाविक विकास पर वृहद प्रकाश डाला था। बहुत पहले आचार्य शुक्ल ने एक बात कही थी भाषा किसी समाज के पुर्जे की पता देती है यदि किसी समाज को नष्ट करना है तो उसकी भाषा को नष्ट कर दिजीए।भाषा का मामला राष्ट्र व समाज की स्मृता की मामला है इसलिए जब कोई भाषा भष्ठ होती है तो समाज भी भष्ठ हो जाता।भाषा में ही मानव का काल बोध होता है तथा उसी में राष्ट की सीमा निर्धारित होती हैं।आज का समय तकनीकि व कम्प्यूटर का है। वर्तमान समय में हिंदी का स्वरूप विश्वव्यापी है पुरी दुनिया में हिंदी भाषा को लेकर एक नूतन जागृति देखी जा रही है दुसरी ओर राष्ट्रीय शिक्षा नीति2020 में जिस प्रकार मातृ भाषाओं में संरक्षण तथा सानिध्य प्रबल दिया गया है वह निश्चित रूप से हमारी संस्कृति सम्पदा तथा गौरव को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगा।
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