हाटा/कुशीनगर। भारतीय ज्ञान परम्परा में प्राचीन काल से ही शिक्षा की तमाम विधियां मौजूद हैं जिनके माध्यम से ज्ञान की धारा सतत् प्रवाहित हो रही है।
उक्त बातें स्थानीय श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय, श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय एवं संस्कृत संस्कृति संस्थान भारत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय ज्ञान परम्परा चिंतन पर आयोजित कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो मार्कण्डेय नाथ तिवारी विभागाध्यक्ष सांख्य योग श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमारी ज्ञान परम्परा सर्वविध कल्याण की भावना से ओत-प्रोत है। भारतीय संस्कृति में ज्ञान के भण्डार पड़े हुए हैं। मनीषियों से फलवती होती हुई ज्ञान परम्परा आज अनेक झंझावातों को सहते हुए भी मजबूती के साथ अग्रसर है। विश्व के लोग भी भारतीय ज्ञान से लाभान्वित हो रहे हैं। शास्त्रों में निहित ज्ञान को यदि वर्तमान में सार्थक रूप से उपयोग किया जाए तो आने वाले समय में हमारे देश की पीढ़ियों को असीम लाभ तो होगा ही संपूर्ण संसार को इस ज्ञान राशि से लाभ होगा। उन्होंने शिक्षा के विविध तरीकों पर भी प्रकाश डाला।
इस दौरान डॉ राजेश कुमार चतुर्वेदी,डा.संदीप कुमार पाण्डेय,श्रुतिश्वर शुक्ल, कार्यशाला परामर्शक संजय कुमार दूबे, संजय कुमार पाण्डेय, अवधेश सिंह, मिथिलेश चौरसिया, अम्बरीष कुमार पाण्डेय, आदि उपस्थित रहे।
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