कसया/कुशीनगर । तहसील क्षेत्र अंतर्गत फाजिलनगर के गड़हिया निवासिनी एक युवा कवयित्री जो लगभग 50 से अधिक कविताएं एवम् पांच सौ से ऊपर शायरी लिख चुकी हैं। यह कवयित्री जो एम काम की छात्रा होते हुए भी साहित्य के प्रति रुचि रखती हैं जो लोगों को प्रेरणा देने में कम नहीं है। आगे चल कर यह साहित्य के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहती हैं। लोग इनकी कविताओं की काफ़ी सराहना भी कर रहे हैं।
बताते चलें कि उक्त नगर पंचायत के गडहिया निवासी सुभाष गुप्ता की पुत्री कंचन कुमारी जो युवा कवयित्री है। यह एम काम की पढ़ाई पूरी कर साहित्य में रुचि रखते हुए लगभग पांच वर्षो से कविताएं लिख रही हैं इनकी प्रमुख कविताएं जैसे, दुनिया की तकलीफे ये दुनिया की तकलीफे। तकलीफ दे जाती है, पता नहीं क्यों आत्मा कुरेद जाती है।।…..
ज़िंदगी जब सिखाती है आपकी बाते याद आती है। कभी जो तंज लगती थी बातें, आज राह दिखाती है।।…..
कोई आश लगाए बैठा है, कर कोशिश अंतिम सांस तक। कोई ताक लगाए बैठा है वार करूं अंतिम हार तक।।…..
कैसी ये विडंबना है, कैसी यह खेल है। सासों की पटरी पर, चल रही जीवन की रेल है।।…….
बेटी घर संभाल लेती है, रिश्ते संभाल लेती है। ज़िम्मेदारी संभाल लेती है फिर भी बोझ है।।……
खुशी की दौड़ में हम पीछे रह गए, सबके गम जो समेटने निकले थे।….
इस साधारण जगत में, असाधारण व्यक्ति विशेष का पैदा होना। और जगत के अज्ञानता से उसकी विलक्षणता का ज्ञान होना आम बात नही है।……. सहित कुल 50 कविताएं और पांच सौ से ऊपर शायरी लिख चुकी है। इनकी साहित्य के प्रति रुचि को देखकर सामाजिक कार्यकर्ता इनको बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहयोग देने की बात कर रहे हैं। इनकी माता सुनैना देवी, भाई श्रीकांत गुप्ता, अनिल गुप्ता, अजीत गुप्ता, पड़ोसी नंदलाल शर्मा, सावित्री शर्मा आदि इनको आगे बढ़ने के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं।
कुशीनगर। किसी भी पुलिस अधिकारी के कार्यकाल का सबसे अहम सवाल यही होता है…
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