खड्डा/कुशीनगर। तहसील मुख्यालय स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय स्थायी चिकित्सक के अभाव में उपेक्षा का शिकार हो गया है। मुख्यालय के केन्द्र पर पशुओं के उपचार एवं गर्भाधान आदि कार्य के लिए आने वाले पशुपालकों को चिकित्सालय बंद होने से दुश्वारियां उठानी पड़ रही हैं।
सोमवार को दिन के 12 बजे ही चिकित्सालय बंद मिला और कमरे के फाटकों पर ताला बंद मिला।
खड्डा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय को पशुओं से संबंधित रोगों के ईलाज के लिए बनाया गया है। इधर कुछ वर्षों से यहां स्थायी चिकित्सक की तैनाती नहीं है जिसके कारण पशुपालकों को काफी दुश्वारियां उठानी पड़ती हैं। अक्सर केन्द्र या तो बंद रहता है अथवा पैरावेट कर्मचारी इसकी देखभाल करते हैं। सोमवार को अस्पताल 12 बजे दिन में बंद मिला और बरामदे में बच्चे खेलते मिले। इसी तरह यहां गर्भाधान केन्द्र भी उपेक्षा का शिकार दिखाई दे रहा है। तहसील मुख्यालय का पशु अस्पताल होने के कारण इसमें स्थायी चिकित्सक एवं कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए लेकिन यहां सभी सुविधाएं नदारद हैं।
पैरावेट पशु मित्रों के जिम्मे तहसील क्षेत्र के गांवों के पशुपालकों के पशुओं का इलाज निर्भर हो गया है। सिर्फ दिखावे के अस्पताल और पशुपालन विभाग की कार्य प्रणाली से लोगों में उपेक्षा का भाव पनप रहा है।
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