कसया/कुशीनगर। दस दिवसीय श्रीराम महायज्ञ के सातवें दिन बुधवार को कथावाचक महंत गणेश दास महाराज ने श्रीराम कथा की अमृत वर्षा कराते हुए केवट प्रसंग और भरत मिलाप का सुंदर चित्रण किया और कहा कि भक्त के प्रेम के आगे भगवान को भी झुकना पड़ता है। भरत कथा भव बंध बिमोचनि कहते हुये कहा कि भरत का चरित्र श्रवण करने मात्र से प्राणी संसार के समस्त कर्म बंधनों से मुक्त हो जाता है। भरत जी का चरित्र बड़े बड़े ऋषियों के लिए भी अगम्य है। भरत जी का त्याग, समर्पण और प्रेम आज के भाईयों के लिए सीखने योग्य है।कथा का प्रारंभ यजमान प्रसून जायसवाल द्वारा व्यास पीठ के पूजन से हुआ।
संचालन सुमित त्रिपाठी ने किया।यज्ञाचार्य रामजी पांडेय के संचालन में श्रीराम महायज्ञ, अयोध्या से आए संतों द्वारा अखंड श्रीराम नाम संकीर्तन और श्रद्धालुओं द्वारा यज्ञ शाला की परिक्रमा अनवरत चलती रही। अयोध्या धाम से आए माँ वैष्णवी श्रीराम जानकी आदर्श राम लीला मंडल के कलाकारों द्वारा विकास शरण के संयोजन में मंगलवार की रात्रि में श्रीराम सीता विवाह, श्रीराम वनगमन और राजा दशरथ मरण का मंचन किया गया।
इस अवसर पर महंत त्रिभुवन शरण दास, व्यवस्थापक देव नारायण शरण, हरिदास शरण, विष्णु शरण, बाल मुकुंद शरण, विनय पांडेय, अरुण पांडेय, अंकिता पांडेय, अजय मद्देशिया, राकेश गिरि, आकाश पांडेय, सोनू तिवारी, मणि प्रकाश यादव, इन्द्र कुमार मिश्र, सच्चिदानंद, निशांत सिंह, अनमोल तिवारी, राधेश्याम सिंह, रामशंकर कुशवाहा, कृष्ण कुमार मिश्र, सुभाष दुबे, सुरेश तिवारी, हृदयानंद तिवारी, सुरेश गुप्ता इत्यादि उपस्थित रहे।
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