कसया/कुशीनगर। नगर स्थित श्रीराम जानकी मंदिर मठ कसया में चल रहे दस दिवसीय श्रीराम महायज्ञ के पांचवे दिन सोमवार को श्रीराम कथा की अमृत वर्षा कराते हुए कथावाचक महंत गणेश दास महाराज ने ऋषि विश्वामित्र के साथ प्रभु श्रीराम के जनकपुर में आगमन, धनुष भंग और श्रीराम जानकी विवाह का मनोरम वर्णन किया और कथा के माध्यम से कहा कि जीवन में ईश्वर को प्राप्त करना है तो सत्संग रूपी बगिया में कदम रखना चाहिए। बिना सत्संग और भक्ति के ईश्वर का दर्शन संभव नही है। जब तक दैहिक भाव तब तक परमात्मा की प्राप्ति असंभव है। अतः हमें दैहिक भाव का त्याग करके संत की शरणागति ग्रहण करनी चाहिए। श्रीराम जानकी विवाह के दौरान सच्चिदानंद के संयोजन में श्रीराम व माता जानकी विवाह की मनोहरी झांकी प्रस्तुत की गई और पांडाल सिया वर राम चंद्र जी की जय के जय घोष से गुंजायमान हो उठा।
कथा का प्रारंभ यजमान अनिल प्रताप राव व सिंधु राव द्वारा व्यास पीठ के पूजन से हुआ। इस दौरान यज्ञाचार्य रामजी पांडेय के संचालन में श्रीराम महायज्ञ, अयोध्या से आए संतों द्वारा अखंड श्रीराम नाम संकीर्तन और श्रद्धालुओं द्वारा यज्ञ शाला की परिक्रमा अनवरत चलती रही। रात्रि में अयोध्या धाम से आए कलाकारों द्वारा भव्य श्रीरामलीला का मंचन किया जा रहा है। संचालन सुमित त्रिपाठी ने किया।
इस अवसर पर महंत त्रिभुवन शरण दास, व्यवस्थापक देव नारायण शरण, विष्णु शरण, डाक्टर दया शंकर तिवारी, बाल मुकुंद शरण, रामजी शरण दास, मंकेश राय, अजय शुक्ल, दीपू पांडेय, अद्या पांडेय, सुरेश गुप्ता, जेडी दुबे, मणि प्रकाश यादव, इंद्र कुमार मिश्र, निशांत सिंह, राकेश जायसवाल, कुश कुमार, विजय चौरसिया, शेष मणि, गंगोत्री देवी, रिद्धिमा, कृष्णावती देवी, ममता कश्यप, वंदना पांडेय, गुड्डी मद्देशिया, हृदयानंद तिवारी इत्यादि उपस्थित रहे।
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