कसया/कुशीनगर। प्रदेश की सबसे बड़ी नगरपालिका में शुमार कुशीनगर करोड़ो खर्च के बाद भी नीट व क्लीन नहीं बन पाया। आज की हुई बरसात ने जल निकासी की पोल खोल दी है तो बजबजाती नलियां नगर के स्वच्छता अभियान का मजाक उड़ा रही हैं।
इस वक्त चल रहे निकाय चुनाव में नगर के विकास को लेकर लोगों में चर्चा में शुरू हो गयी है। वर्ष 2017 में नगरपंचायत कुशीनगर नगरपालिका बनी। उस समय नगरपालिका में कसया ब्लाक के 41 गांव शामिल किए गए। नगर वासियों का कहना है कि नगर का जो समुचित विकास होना चाहिए था वह नहीं हुआ और धीरे धीरे पांच साल निकल गए। विकास का नजारा देखना हो तो वार्ड बने गांवों में जायँ तो विकास का वादा करने वाले नेताओं की पोल खुल जाएगी। नगर के मल्लूडीह में जिधर एक मंदिर और विवाह भवन बना है। उस रास्ते पर जल निकास न होने से करीब दो साल से घरों का गंदा पानी जमा हुआ है।
नगरपालिका अध्यक्ष पद की प्रत्याशी प्रतिमा वर्मा के पहुंचने पर मतदाताओं ने उन्हें रोक लिया और दुर्दशा बयान किया। यहां विवेक कुमार वर्मा ने कहा कि स्वच्छता में दूसरे स्थान पर आई नगरपालिका का विकास छलावा है। इसी तरह अनिरुद्धवा, डुमरी, सिसवा, सपहा, मथौली, बरवा जंगल सहित पूर्व के गांवों की नालियां और सड़कें विकास की कहानी को आईना दिखा रही हैं तो हाईवे पर कूड़ों का ढेर पर्यावरण के लिए खतरा बना हुआ है।
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