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कुशीनगर: डॉक्टर की लापरवाही ने महिला की गोद की सुनी

न्यूज अड्डा कसया

Reported By:

Mar 26, 2022  |  6:33 PM

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कुशीनगर: डॉक्टर की लापरवाही ने महिला की गोद की सुनी

कसया/कुशीनगर। डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है लेकिन कुशीनगर जिले में प्राइवेट अस्पताल की लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है. इसके मुताबिक एक महिला का गर्भपात करवा दिया गया बिना परिजनों को सूचना दिए,देखिए कुशीनगर से आई इस सनसनीखेज मामले की पूरी पड़ताल की गयी।

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नीम हकीम खतरा ए जान वाली कहावत आपने जरूर सुनी होगी।मगर यहां नीम हकीम नहीं बल्कि बोर्ड पर बड़ी बड़ी डिग्रियां तानकर अस्पताल खोले बैठे डाक्टरों का भी हाल नीम हकीम से अलग नहीं है। महिला का कहना है कि पांच महीने की प्रेगनेंट ये महिला ब्लिडिंग की वजह से कुशीनगर के कसया नगर में स्थित एक अस्पताल पहुंची। जहां पर्ची भी कटवाई फीस भी जमा हुई मगर बिना डॉक्टर के दिखे बिना पर्ची पर कोई दवा लिखे अस्पताल में स्थित मेडिकल स्टोर से डायरेक्ट दवा दे दी गई। नतीजा महिला को इंजेक्शन लगाने के कुछ वक्त बाद उसका अबार्शन हो गया,एक बड़ी लापरवाही ने महिला के पेट में पल रहे 5 महीने के मासूम बच्चे की जान ले ली महिला की हालत देख कसया के सरकारी अस्पताल में महिला को भर्ती करवाया गया,जहा महिला का इलाज चल रहा है,फिलहाल इस मामले में माहिला के परिजन महिला की हालत को लेकर चिंतित है।

लापरवाही की इंतहा तो देखिए। अस्पताल की पर्ची कट गई लेकिन किसी भी डाक्टर ने दवा लिखने तक की जहमत नहीं उठाई। सीधे दवा दिला दी गई। जबकि कानूनन बिना डाक्टर के लिखे मेडिकल स्टोर से दवा नहीं दी जा सकती।मौजूद डाक्टर ने भी माना कि वो मौके पर नहीं थे। हालांकि बिना पर्ची पर दवा लिखे सीधे मेडिकल स्टोर से दवा देने के सवाल पर वो गोल मोल जवाब देते नजर आए

वहीं इस मामले में कसया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के महिला चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर नीलकमल का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आया है, मामला गर्भपात का वह भी बिना पर्ची पर दवा लिखे आखिर किसकी सलाह पर दवा दी गई यह बड़ी लापरवाही है और महिला की जान भी जा सकती थी,इसकी जांच करवा कर उचित कार्यवाही की जायेगी, कुल मिलाकर जनपद में कुकुरमुत्ते की तरह उग आए अस्पताल सिर्फ और सिर्फ उगाही का जरिया बन चुके हैं। ऐसा कोई महीना नहीं जब अस्पतालों की लापरवाही दो चार की जान पर भारी ना पड़ी हो।हर बार स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई का दावा करता है मगर हालात जस के तस हैं। सवाल उठता है कि मौत के सौदागर बन चुके इन लापरवाह निजी अस्पतालों पर अंकुश कब लगेगा। क्या प्रशासन और कुछ मौतों के इंतजार में है।

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