कसया/कुशीनगर। विकास तहसील क्षेत्र के ग्राम बटेसरा में आयोजित अजमते वाल्दैन बराये इसाले सबाब मरहूम फुलमान साहब के 26 वें सालाना जलसा के मौके पर अपनी तकरीर में मौलानाओं ने इस्लाम को मोहब्बत का पैगाम देने वाला मजहब बताया तो मां को जन्नत का दरवाजा और बाप को जन्नत की चाभी बताया।
जलसे में अपनी तकरीर पेश करते हुए मौलाना नासीर अली ने कहा कि मां – बाप की दुआ से हर मुसीबत खत्म हो जाती है। अल्लाह के रसूल ने फरमाया है कि मां बाप की नाफरमानी करने वाले, शराब पीने वालों की नमाज काबुल नहीं होती और न ही जन्नत नसीब होता है। मौलाना मजहरुल कादरी ने मजलिस में कहा कि चाहे कितना भी रोजा रहे, जकात दे, नमाज पढ़े लेकिन जबतक मां बाप की खिदमत नहीं करेगा। खुदा से कुछ भी नहीं मिलने वाला। इसी क्रम में मौलाना आबिद अली, मौलाना मुख्तार खान कोलकाता ने इस्लाम मजहब को दुनिया का खूबसूरत व उम्दा मजहब करार देते हुए कहा कि इस्लाम सिर्फ और सिर्फ मोहब्बत की बात करता है। इसी में दुनिया की भलाई है। साथ ही राम, कृष्ण व बुद्ध, नानक, कबीर के तकरीरों में इंसान व इंसानियत की भलाई की बाताई। सुफियान रज़ा व सलीम रज़ा ने शेर, नशिस्त और नगमें के माध्यम से पेश किया। सभी को माल्यार्पण व गृह उपयोगी बस्तुएँ देकर आयोजक मरहूम फुलेमान के सुपुत्र हसमुद्दीन साहब ने सम्मनित किया।
इस अवसर पर हलीम अहमद, साहब ज़ादा अली, हदीश अहमद, मोहनलाल गुप्ता, पत्रकार हृदया नन्द शर्मा, अनवर अंसारी, कादिर अंसारी, अलीमुल्लाह, मनौवर अंसारी, फैज खान, शौकत अंसारी, साबिर अंसारी सहित ग्रामीण उपस्थित रहे।
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