साखोपार/कुशीनगर (न्यूज अड्डा)। जिले के कसया तहसील अंतर्गत ग्राम सभा साखोपार स्थित प्राचीन कोट स्थान इन दिनों आस्था का केंद्र बना हुआ है।
नवरात्रि के महीने में हर साल यहां श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग जाती है, क्षेत्रीय ग्रामीणों के अलावा दूरदराज से भी लोग दर्शन को आते हैं, बताया जाता है कि कोट वाली माता सभी की मनोकामनाएं पूरी करती हैं, स्थान के बारे में बताया जाता है कि यहां थारू जाति के लोगों कि बस्ती थी, और यह दुर्गा मां का स्थान साखु के जंगल में ऊचे टीले पर था तथा चारो तरफ गहरा तालाब है।स्थान के पास ऊंचे टीले पर एक विशालकाय पाकड़ का पेड़ है जो बहुत ही प्राचीन है, ग्रामीण बताते हैं कि यहां अजगर सर्प भी है लेकिन कभी किसी का कोई नुकसान नहीं किया, दुर्गा स्थान के इस टीले को देखने से लगता है यहां कोई किला या बड़ा भवन रहा होगा इसका कोई प्रमाण नहीं है।वैसे बुजुर्ग बताते हैं की रैका गढ़ से रैकवार क्षत्रियों का कुछ परिवार बहराइच पहुंचा और कुछ परिवार यहां से पडरौना के पास आकर अपना निवास बनाया और कुल देवी के रूप में कोट माता को माना, तभी से कोट माता स्थान पर बलि परम्परा शुरू हुई और आज भी यह परम्परा कायम है। पहले सिर्फ रैकवार क्षत्रिय ही बलि देते थे लेकिन अब मनौती मांग कर अन्य लोग भी बालि देते हैं परन्तु पहला बली आज भी रैकवार परिवार के स्वर्गीय नवल किशोर सिंह के कुटुंब से दिया जाता है।
श्रद्धालु बताते हैं कि कोट मा बहुत दयालु हैं और ये सभी की मुरादें पूरी करती हैं। बलि के अलावा यहां हलुआ पुडी, चना हलुआ आदि भी प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है।श्रद्धालुओं का कहना है कि भूत पीचास यहां माता के दर्शन मात्र से दूर भाग जाते हैं, भयंकर चेचक यहां पहुंचने के बाद बिल्कुल शांत हो जाता है, लोग यहां पुत्र आदि की मन्नत लेकर आते हैं।
इस समय नवरात्रि के कारण प्रतिदिन श्रद्धालुओं की काफी भीड़ जुट रही है।
अब्दुल मजीद/न्यूज अड्डा
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