कुशीनगर। सूबे में परिवहन व्यवस्था पर सख्ती के सरकारी दावे हैं, लेकिन कुशीनगर की हकीकत इन दावों को आईना दिखाती है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे खुले ढाबों और रेस्टोरेंट्स की आड़ में, परिवहन विभाग के अफसर और कर्मी बिना परमिट और ओवरलोड लक्ज़री बसों-ट्रकों के संचालन को हरी झंडी दे रहे हैं। नतीजा—राज्य सरकार के खजाने को रोज़ लाखों का चूना और सड़कों पर हादसों का खतरा।
सूत्रों का कहना अगर सही मानते है तो आरटीओ कुशीनगर और यात्री कर अधिकारी की मिलीभगत से गोरखपुर बाईपास और मुझहाना-हेतिम टोल प्लाज़ा के पास स्थित दो मशहूर ढाबों को ‘एंट्री पॉइंट’ बनाया गया है। यहां लक्ज़री बसों और ट्रकों से प्रति गाड़ी ₹5,000 की वसूली की जाती है। इन ढाबों पर खड़ी गाड़ियों से न तो परमिट चेक होता है, न ही ओवरलोड पर कोई कार्रवाई।
देवरिया में तैनाती के बाद भी एक खास सिपाही को ‘अटैचमेंट’ के नाम पर कुशीनगर वापस बुला लिया गया। यह सिपाही अधिकारियों का चहेता है, जो ‘मां लक्ष्मी का चढ़ावा’ चढ़ाने में माहिर माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक, इस पर आरटीओ कुशीनगर की ‘विशेष कृपा’ बनी रहती है।
इससे पहले 2019-20 में भी बस्ती और खलीलाबाद में ऐसे ही गोरखधंधे में दो परिवहन अधिकारी, कर्मचारी और ढाबा संचालक पकड़े गए थे। एंट्री की पूरी डायरी बरामद होने के बाद कई लोग जेल गए और मंडल स्तर के कई अधिकारियों पर एसआईटी जांच बैठी थी।
आरटीओ, यात्री कर अधिकारी और ढाबा संचालकों की यह तिकड़ी प्रतिदिन सरकार के लाखों रुपये के राजस्व को डकार रही है। अब देखना है कि जिलाधिकारी महोदय इस गठजोड़ पर नकेल कसने के लिए ठोस कार्रवाई करते हैं या यह ‘हाईवे का गोरखधंधा’ यूं ही फलता-फूलता रहेगा।
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