कुशीनगर। मानवता को झकझोर देने वाली घटना जिले के सेवरही विकास खण्ड के हफुआ चतुर्भुज स्थित परिषदीय विद्यालय से सामने आई है। जहां लापरवाही के चलते कक्षा-3 का आठ वर्षीय मासूम छात्र आयुष विद्यालय के एक कमरे में सोमवार की दोपहर से कैद रहा और रात्रि भर भूखा-प्यासा तड़पता रहा।
सोमवार की छुट्टी के बाद गुरुजी की जल्दबाजी इतनी अधिक थी कि उन्होंने बिना देखे ही कमरे में ताला जड़ दिया। इस दौरान मासूम आयुष उसी कमरे में बंद रह गया। बाहर से ताला लग जाने के कारण वह निरंतर चीखता-चिल्लाता रहा, परंतु विद्यालय परिसर सुनसान होने के कारण उसकी आवाज किसी ने नहीं सुनी।
रात्रि भर घरवाले अपने लाडले की खोजबीन करते रहे। माँ की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे और बेबस पिता गांव-गांव तलाश करते रहे, लेकिन उनका मासूम विद्यालय में कैद होकर तड़पता रहा।
मंगलवार की सुबह जब ग्रामीण विद्यालय के बगल स्थित हनुमान मंदिर में पूजा करने पहुंचे, तभी उन्होंने कमरे के अंदर से रोने-चिल्लाने की आवाज सुनी। शोर-शराबा होने पर ग्रामीण जुटे और जब दरवाजा खोला गया तो मासूम आयुष बेसुध-सा अंदर से मिला।
करीब 18 घंटे तक भूखे-प्यासे रहने के बाद मासूम को जब बाहर निकाला गया तो परिजनों ने उसे गले लगाकर राहत की सांस ली। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में आक्रोश फैल गया और अभिभावकों ने विद्यालय के जिम्मेदारों पर गंभीर आरोप लगाए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार शिक्षक के खिलाफ कठोर कार्यवाही हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
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