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Kushinagar News/कुशीनगर: कच्ची शराब बनाने के लिए कलंकित गांव की महिलाएं बनी आत्मनिर्भर, पढ़े पूरी खबर!

Chandra Prakash Tripathi

Reported By:

Mar 31, 2022  |  7:50 PM

1,062 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
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  • सुबुधिया खुर्द की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता को चरितार्थ करते हुए स्वयं खोजीं रोजगार

सुकरौली/कुशीनगर। कुशीनगर जिले के विकास खण्ड सुकरौली क्षेत्रान्तर्गत ग्राम पंचायत सुबुधिया खुर्द कभी कच्ची शराब बनाने व बेचने के लिए कलंकित था।गांवों में तमाम लोगों के दरवाजों पर दारू बनाने के लिए धधकती थी भट्ठियां इतना ही नहीं गांव की बगल से गुजर रही मझना नाले के दोनों तरफ दर्जनों भट्ठियां धधकती रहती थी। कुछ लोगों के दरवाजों पर पियक्कड़ों की टोलियां दिखाई देती थी गांव को जोडने वाले हर रास्तों पर पियक्कड़ों का हुजूम दिखाई देता था लेकिन तत्तकालीन जिलाधिकारी आंध्रा वामसी और पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद ने गांव में चौपाल लगाकर लोगों को समझा-बुझाकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित की जिससे प्रभावित होकर लोगों ने कच्ची शराब बनाने की अवैध धंधे को बंद कर दिया। गांव के पुरुष मेहनत मजरूरी से लगायत रोजी रोटी के लिए अन्यत्र कार्यों में पूरी लगन के साथ जुट गए। वही गांव की कुछ पढ़ी लिखी महिलाएं घर पर ही रहकर कार्य करने की सोच रखते हुए स्वयं सहायता समूह के माध्यम से स्वरोजगार की तरकीब ढूंढ़ी।

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बताते चलें कि गांव की इंटरमीडिएट तक पढ़ी गृहणी मनोरमा देवी ने कहा की मेरा गांव पहले कच्ची शराब बनाने व बेचने के नाम से कलंकित था पूर्व में जिले के आला अधिकारियों ने चौपाल लगाकर स्वयं सहायता समूह से जोड़ने का कार्य किया।उस दौरान सरस्वती महिला स्वयं सहायता समूह व शिवम स्वयं महिला सहायता समूह से महिलाओं को जोड़कर स्वरोजगार की मुहिम चलाई। वर्तमान में गांव में कुल 27 समूह संचालित हो रही है। जिसमें सरस्वती महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा पत्तल बनाने का व शिवम स्वयं महिला सहायता समूह द्वारा अगरबत्ती बनाने का कार्य किया जा रहा है। मनोरमा देवी ने कहा कि हमने समूह से ₹110000 रुपये का ऋण लिया जिसमें ₹75000 रुपये का मशीन खरीदी और शेष राशि से रॉ मटेरियल और डाई ख़रीदी।पत्तल बनाने वाली मशीन आ जाने से सरस्वती महिला स्वयं सहायता समूह कि 5 महिलाओं को रोजगार मिल चुका है।पत्तल की बिक्री अगर बढ़ जाती और सरकार की तरफ से कुछ अनुदान अवमुक्त हो जाती तो हम महिलाओं को रोजी रोजगार में अन्यत्र कहीं भटकना नहीं पड़ता। फिर भी शांति देवी संगीता रंभा देवी उर्मिला चंपा आदि महिलाएं कार्य कर रही हैं। सरकार द्वारा हम महिलाओं को अगर स्वरोजगार योजना के तहत सहयोग मिलता तो रोजी रोटी के साथ अपने बच्चों की भरण पोषण करने के साथ ही अच्छी शिक्षा दिला सकती।

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