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कुशीनगर: बेटी दिवस पर लोगो ने शुभकामनायें देकर हर क्षेत्र में बेटियों के योगदान को सराहा

न्यूज अड्डा डेस्क

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Sep 25, 2022  |  7:43 PM

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कुशीनगर: बेटी दिवस पर लोगो ने शुभकामनायें देकर हर क्षेत्र में बेटियों के योगदान को सराहा

मल्लूडीह/कसया। बेटियों के बिना संसार का निर्माण व मानव जीवन का साकार होना संभव नहीं है l बेटियों का दुनिया में अहम् योगदान है l आज के परिवेश में माता -पिता के लिये अनमोल हैँ बेटियां l बेटियों पर माता -पिता, भाई-बहन, दादा -दादी सभी को गर्व हैँ l आज बेटियां दुनिया में हर प्रकार से संघर्ष कर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्षम हैँ l सेना, हवाई जहाज, समुद्र, विज्ञान, डॉक्टर हर क्षेत्र में अपने कामयाबी का झण्डा गाड़ कर दिखा दिया हैँ कि हम दुनिया में किसी भी चुनौती को पुरुषों की तरह सामना कर जीत सकते हैँ l बेटियां इस आधुनिक युग में भी माता -पिता का सबसे ज्यादा ख्याल रखती हैँ, उनके बुढ़ापे की सहारा हैँ l दूर रहकर भी बेटियां सदैव माता -पिता का शुभ चिंतक बनी रहती हैँ l किसी भी क्षेत्र में बेटियां किसी से कम नहीं हैँ l उक्त बाते आज 25सितम्बर को बेटी दिवस पर माता -पिता ने उनके योगदान की चर्चा करतें हुए कहीं l कसया नगर निवासी पत्रकार पवन शर्मा ने कहा कि बेटियां हैँ तो जहाँन हैँ, बेटियों जैसा अनमोल कुछ भी नहीं l

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कुशीनगर निवासी शिक्षक मनोज चौरसिया ने कहा कि बेटियां ही अपने माता -पिता के संतान होने का सबसे बड़ा कर्तब्य निभाती हैँ l ग्राम बटेसरा निवासी समाजिक कार्यकर्ता व वरिष्ठ पत्रकार हृदयानन्द शर्मा ने बेटियों को बेटी दिवस पर बधाई देते हुए कहा कि बेटियां माता -पिता की लाडली तो हैँ ही,इसके साथ ही पाताल से लेकर आसमान तक अपने कामयाबी का परचम लहरा चूकी हैँ l अधिवक्ता दीवानी न्यायालय कसया चंद्रशेखर शुक्ला ने कहा कि बेटियों के बिना जीवन संभव नहीं हैँ, आज के दौर में सब रिश्ते -नाते दूर हो जाने के बाद भी मुश्किल और दुख की घड़ी में सदैव बेटियां माता -पिता की सहारा बनी रहती हैँ, खासकर बुढ़ापे की लाठी हैँ बेटियां l इस प्रकार आज ‘बेटी दिवस’ पर लोग बधाइयाँ देने के साथ -साथ बेटियों पर गर्वान्वित होने की बात कर रहे हैँ l बेटी दिवस दुनिया के अलग-अलग देशों में स्पेशल डे, के रूप में मनाते हैँ,अलग-अलग दिन सेलिब्रेट किया जाता हैl भारत में हर साल ‘डॉटर्स डे’ सितंबर के आखिरी रविवार 25 सितंबर को मनाया जा रहा है । इस दिन को मनाने का उद्देश्य है कि परिवार में बेटियों की भूमिका को कम ना आंका जाए । पुरुष प्रधान समाज में बदलाव लाने के लिए इस दिन का विशेष महत्व है । इसी कारण 11 अक्टूबर 2012 में संयुक्त राष्ट्र ने लड़के और लड़की के बीच के अंतर को पाटने के लिए इस दिन की शुरुआत की थी ।

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