कसया/कुशीनगर। श्रीराम जानकी मंदिर मठ कसया में चल रहे दस दिवसीय श्रीराम महायज्ञ के छठवें दिन मंगलवार को श्रीराम कथा का रस पान कराते हुए कथावाचक महंत गणेश दास महाराज ने श्रीराम वनवास और राजा दशरथ के मरण का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि जीवन में काम, क्रोध और लोभ यदि ये दुर्गुण हैं तो राम राज्य संभव नही है। अवधवासियों की नित नयी कामनाओं के कारण ही श्रीराम वनवास का प्रसंग बना। रामजी ने वन में जाकर धरती का बहुत बड़ा भार हल्का किया। अधम से अधम जीवों को अपनाया और जगत को ये संदेश दिया कि जीव मात्र के प्रति हमारे हृदय में करुणा एवं प्रेम का भाव होना चाहिये।कथा का प्रारंभ यजमान राजेश मद्देशिया व राकेश जायसवाल द्वारा व्यास पीठ के पूजन से हुआ। संचालन सुमित त्रिपाठी ने किया।
इस दौरान यज्ञाचार्य रामजी पांडेय के संचालन में श्रीराम महायज्ञ, अयोध्या से आए संतों द्वारा अखंड श्रीराम नाम संकीर्तन और श्रद्धालुओं द्वारा यज्ञ शाला की परिक्रमा अनवरत चलती रही। अयोध्या धाम से आए माँ वैष्णवी श्रीराम जानकी आदर्श राम लीला मंडल के कलाकारों द्वारा सोमवार रात्रि में जनकपुर में धनुष भंग और श्रीराम सीता विवाह का मंचन किया गया।
इस अवसर पर महंत त्रिभुवन शरण दास, व्यवस्थापक देव नारायण शरण, विष्णु शरण, बाल मुकुंद शरण, उपेंद्र दुबे, रविन्द्र तिवारी, अजय तिवारी, अरविंद गुप्ता, सचिन पाठक, सुरेश गुप्ता, वीरेंद्र तिवारी, इन्द्र कुमार मिश्र, मणि प्रकाश यादव, सच्चिदानंद, निशांत सिंह, अनमोल तिवारी, जेडी दुबे, सावित्री देवी, दुर्गावती, निर्मला, संजना, मृत्युंजय, विकास, कविता, बबिता, सीता, ममता, गुड्डी, वंदना, कृष्णावती, सुरेश, अशर्फी, विनय पांडेय इत्यादि उपस्थित रहे।
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