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कुशीनगर: रेता क्षेत्र में गंडक का उफान हुआ कम, गुरुवार को वारिश व डिस्चार्ज थमा

Sanjay Pandey

Reported By:

Jun 17, 2021  |  9:25 PM

797 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
कुशीनगर: रेता क्षेत्र में गंडक का उफान हुआ कम, गुरुवार को वारिश व डिस्चार्ज थमा WhatsApp
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खड्डा/कुशीनगर। गण्डक नदी का उफान रेताक्षेत्र के गांवों में कम होने लगी हैं। गण्डक बराज से गुरुवार को पानी का डिस्चार्ज कम होने से बाढ़ का पानी जलप्लावित गांवो में कम होने लगी है लेकिन प्रभावित गांवों के लोगों की दुश्वारियां कम होने के वजाय बढ़ गई हैं। बुधवार को अधिकांश लोगों के घरों में पानी भर जाने से चूल्हे नहीं जले। गुरुवार को बारिश व डिस्चार्ज थमा हुआ है।
गुरुवार को विधायक जटाशंकर त्रिपाठी, एसडीएम अरविंद कुमार व बाढ़ बचाव के लिए एसडीआरएफ की टीम को साथ लेकर प्रभावित इलाकों में कार्य के लिए पहुंचे।कुशीनगर: रेता क्षेत्र में गंडक का उफान हुआ कम, गुरुवार को वारिश व डिस्चार्ज थमागुरुवार को नेपाल सहित पहाड़ी नदियों में कम जलप्रवाह के कारण बाल्मीकि गण्डक बराज से दोपहर 2 बजे 2 लाख 42 हजार क्यूसेक पानी नदी में छोड़े जाने से बाढ़ प्रभावित गांव शिवपुर, हरिहरपुर, बसन्तपुर, शाहपुर, मरिचहवां, नरायनपुर, बालगोविंद छपरा, मथुराछपरा, विंध्याचलपुर सहित सालिकपुर व महदेवा गांव में बाढ़ का पानी धीरे धीरे कम होने लगा है। एसडीएम के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित गांवों में बुधवार को सामुदायिक कीचन के माध्यम से भोजन की ब्यवस्था करायी गयी है, फिर भी अधिकांश घरों में पानी लगने से भोजन का संकट पैदा हो गया है। जहरीले जीव-जंतुओं से लोग डरे सहमें हैं तो अधिकांश घरों में राशन आदि भी पानी लगने से भींग गए हैं। कुछ लोगों ने मचान व चौकी को ऊंचाकर रात बिताया।पशुओं के लिए बड़ी मशक्कत से लोग चारे का प्रवन्धन कर पा रहें हैं। पानी के तेज बहाव से तमाम जमीनें व फसलें कट गयी हैं। तो कुछ गांव अब भी पानी से डूबे हुए हैं। अभी भी गांवों के सम्पर्क मार्ग कटने से आवागमन ठप है। बसन्तपुर गांव के लोग नाव का इंतजाम न होने से बसहीं व अन्य स्थानों पर आ जा नहीं पा रहे हैं। शाहपुर गांव में बाढ़ के पानी से घिरे लगभग 100 लोगों को प्रधान प्रतिनिधि सन्तोष राय ने नांव से बच्चे, महिलाओं व अन्य लोगों को सुरक्षित स्थान पर शरण दिलाया है जबकि जोखन, साहेब, हरिवंश, साधू, अंगद, सुबाष, केदार, भोला सहित 50 से अधिक लोग अबभी बाढ़ से शाहपुर गांव में घिरे हुए हैं। शाहपुर गांव के द्वारिका की चार भैंस अब भी घर से गायब हैं। कुछ अन्य पशु भी बाढ़ में अबतक लापता हो गये हैं। प्रशासन की सतर्कता से फिलहाल बाढ़ पीड़ितों के दर्द को दूर करने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है फिर भी गण्डक के कहर से बाढ़ प्रभावित लोग काफी दु:ख दर्द झेलने को मजबूर हैं।

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