कसया/कुशीनगर। बिना श्रद्धा प्रभु पर अटूट विश्वास तथा गुरु की कृपा हुए ईश्वर की प्राप्ति असंभव है मनुष्य के दुख का मुख्य कारण तृष्णा तथा मोह है अपनी वाणी तथा कर्म को यदि ईश्वर को समर्पित कर दिया जाए तो कोई दोष नहीं होगा जहां तक संभव हो प्रतिष्ठा एवं अपनी बड़ाई से बचा जाए यदि जीवन में प्रभु की आराधना एवं उनकी याद भूल जाएं तो समझले की दुख का आगमन हो चुका है प्रभु के गुणगान से समस्त दुखों का तत्काल नाश हो जाता है,विभिन्न धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वारा जन-जन में भक्ति का प्रचार प्रसार किया जा रहा है.
उक्त बातें एक प्रेस वार्ता के दौरान बी.पी पाठक ने कही,आपको बता दे कि जनपद कुशीनगर के ग्राम सपहा निवासी बी.पी पाठक जो उत्तर प्रदेश राज्य सरकार में एक मंडलीय राजपत्रित अधिकारी से सेवानिवृत्त हुए हैं वर्तमान समय में आध्यात्मिक क्षेत्र में सत्संग के आयोजन राम कथा एवं श्री हनुमत चरित्र सहित अन्य मानस मंथन को निशुल्क आयोजित करा कर समाज के अंदर वैदिक संस्कृति के प्रचार प्रसार तथा जनमानस को धर्म पर चलने हेतु विशेष सहयोग दे रहे हैं,बी.पी पाठक द्वारा संगीत कथाओं का कथा व्यास के रूप में निशुल्क आयोजन संपन्न कराया जाता है..
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