कुशीनगर। आरटीओ कार्यालय के आसपास सक्रिय जालसाजों ने फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का ऐसा खेल चला रखा था, जिसका खुलासा होने पर पुलिस भी हैरान रह गई। आरटीओ कार्यालय के निकट कंप्यूटर सेंटर की आड़ में दो व्यक्ति कथित तौर पर फर्जी और कूटरचित ड्राइविंग लाइसेंस तैयार कर लोगों को बेच रहे थे। मूल लाइसेंस की तरह दिखने वाले स्मार्ट कार्ड तैयार कर ग्राहकों से मनमानी रकम वसूली जा रही थी। रविन्द्रनगर धूस पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से दो फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस, 10 स्मार्ट कार्ड चिप, दो लैपटॉप, दो मोबाइल फोन, प्रिंटर-स्कैनर और 4,830 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में जनपद में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के क्रम में तीन नवंबर 2026 को थाना रविन्द्रनगर धूस पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान जमीर अहमद पुत्र बसावन अली निवासी भिसवा सरकारी तथा श्यामजी पुत्र स्व. रामनरेश प्रसाद निवासी बसडीला, थाना रविन्द्रनगर धूस, जनपद कुशीनगर के रूप में हुई है। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपित जमीर अहमद आरटीओ कार्यालय के निकट ‘जमीर कंप्यूटर सेंटर’ नाम से दुकान संचालित करता था। यहां आने वाले लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन बीमा और पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) से संबंधित ऑनलाइन कार्य किए जाते थे। इसी की आड़ में दोनों आरोपित ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे, जिन्हें तत्काल हैवी ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत होती थी। उनकी जरूरत और मजबूरी का फायदा उठाकर उनका आवश्यक डेटा हासिल कर लिया जाता था। इसके बाद दोनों आरोपित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से कथित तौर पर मूल ड्राइविंग लाइसेंस की हूबहू नकल तैयार करते थे। तैयार किए गए फर्जी स्मार्ट कार्ड ग्राहकों को सौंपने के बदले उनसे मनमानी रकम वसूली जाती थी। पुलिस के मुताबिक, दिन में दुकान पर ऑनलाइन कार्य करने के दौरान लोगों का डेटा जुटाया जाता था, जबकि रात के अंधेरे में लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज तैयार किए जाते थे।
पूछताछ में आरोपितों ने पुलिस को बताया कि उनकी दुकान पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य ऑनलाइन कार्य कराने पहुंचते थे। इनमें कुछ लोग ऐसे भी होते थे, जिन्हें तत्काल हैवी ड्राइविंग लाइसेंस की आवश्यकता रहती थी। ऐसे लोगों का डेटा लेकर दोनों फर्जी लाइसेंस तैयार कर उपलब्ध कराते थे। देखने में ये लाइसेंस बिल्कुल असली जैसे प्रतीत होते थे। इस अवैध कारोबार से दोनों आरोपित मोटी कमाई कर रहे थे। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से दो फर्जी एवं कूटरचित ड्राइविंग लाइसेंस स्मार्ट कार्ड, 10 पीवीसी स्मार्ट कार्ड चिप, एक कैनन कंपनी का प्रिंटर-स्कैनर, दो लैपटॉप, दो मोबाइल फोन तथा 4,830 रुपये नकद बरामद किए हैं। बरामद उपकरणों को पुलिस ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने में प्रयुक्त सामग्री बताया है। इस मामले में थाना रविन्द्रनगर धूस में मु0अ0सं0 178/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) एवं 339 में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस दोनों आरोपितों के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई में जुटी है। गिरफ्तार आरोपित जमीर अहमद का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके विरुद्ध थाना रविन्द्रनगर धूस में पूर्व में मु0अ0सं0 121/2025 के तहत बीएनएस की धारा 329(3), 109, 110, 125, 351(3) एवं 117(2) में मुकदमा दर्ज है।
यहां बताना चाहूंगा कि फर्जी लाइसेंस बनाने के इस नेटवर्क का खुलासा करने वाली संयुक्त टीम में थानाध्यक्ष अमित कुमार सिंह, साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक सुनील कुमार सिंह, उपनिरीक्षक सूर्यभान यादव, उपनिरीक्षक विनायक यादव, साइबर सेल के कांस्टेबल प्रशांत मिश्रा व अखिलेश गुप्ता, थाना रविन्द्रनगर धूस के कांस्टेबल आशुतोष कुमार तथा रिजर्व कांस्टेबल प्रवीण कुमार शामिल रहे।
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