कुशीनगर। लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को आसमान पर सुबह से ही छाई सावन की काली घटाएं दोपहर झूम कर बरसीं। लंबे इंतजार के बाद हुई झमाझम से चार लाख किसानों के मुरझाए चेहरे खिल उठे। बारिश के बीच ही किसान परिवार खेतों में पहुंचकर धान रोपाई के अधूरे कार्य को पूरा करने में जुटे दिखे। मानसून की बेरुखी के कारण सवा लाख हेक्टेअर से अधिक क्षेत्रफल में से अब तक सिर्फ 50 प्रतिशत क्षेत्र में ही रोपाई का कार्य हो पाया है।
किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में इसी तरह बारिश होती रही तो रोपाई में हुई देरी से आशंकित नुकसान की भरपायी काफी हद तक तक हो सकेगी। इससे धान व गन्ना दोनों की उपज को फायदा मिलेगा। दोपहर बाद हुई झमाझम से आम लोगों को भी भीषण उमस भरी गर्मी से काफी हद तक राहत मिली। दूसरी तरफ कुछ घंटे की बारिश ने एक बार फिर से प्रशासन के जलभराव न होने देने के दावे की पोल खोल दी। जल निकासी का उचित इंतजाम न होने के कारण बारिश के कारण क्षेत्र में जगह जगह हुए जलभराव ने लोगों की परेशानी को बढ़ा दी।
गुरुवार को जिले के ज्यादातर क्षेत्रों में मूसलाधार तो कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई। घंटो तक हुई जोरदार बारिश से धान किसानों को काफी राहत मिली है। आषाढ़ के बाद सावन का पहला सप्ताह भी सूखा बीत जाने के बाद खेतों में दरारें पड़ने लगी थीं।
जलभराव ने बढ़ायी सभी की परेशानी: गुरुवार दोपहर बाद हुई घंटे भर की जोरदार बारिश से जगह जगह हुए जलभराव ने सभी की परेशानी को बढ़ा दिया। जलनिकासी के इंतजाम न होने के कारण मार्ग पर पूरी तरह जलभराव रहा। इससे लोगों को आवागमन में काफी परेशानी उठानी पड़ी। शहर के कई इलाकों में भी लोगों को घंटों जलभराव की परेशानी से जूझना पड़ा।
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