रामकोला/कुशीनगर। बारिश शुरू होते ही किसानों के मुरझाए चेहरे पर रौनक लौट आई है। उमस और गर्मी के साथ-साथ धूप से जनजीवन बेहाल हो गया था और हर तरफ त्राहि-त्राहि मचा हुआ था, बारिश के अभाव में किसानों की गन्ना की फसलें और नर्सरी सूख रही थी तथा किसान उसको बचाने की जुगत में लगा हुआ था।
गुरुवार की रात में शुरू हुई बारिश से जहां मौसम खुशगवार हो गया है वहीं फसलों को संजीवनी मिल गई है। गोपाल राव, प्रमोद सिंह,लालबहादुर राव, विश्वनाथ मद्धेशिया, सुरेंद्र सिंह राजू, लालजी राव, नन्ने सिंह, श्याम जी राव, ओम प्रकाश राव आदि किसानों ने बताया कि धान की रोपाई के लिए बरसात का इंतजार था। गुरुवार की रात में शुरू हुई बारिश की वजह से कृषि के कार्यों में तेजी भी आ गई है तथा सुख रहे गन्ने की फसल के लिए भी काफी फायदेमंद साबित होगा और हरियाली जाएगी। किसानों ने बताया कि किसानों का भविष्य फसलों पर टिका होता है, अच्छी फसली नहीं हुई तो माली हालत खराब हो जायेगी और किसान कर्ज से दब जायेगा।समय से बरसात न हेने की वजह से फसलों पर लागत बढ़ जाती है।किसानों के पास पर्याप्त सिंचाई के साधन हो या ना हो लेकिन बरसात का इंतजार सभी किसानों को रहता है। बरसात के बिना अच्छी फसल की उम्मीद नहीं की जा सकती।
किसानों ने बताया कि धान रोपाई के दौरान यदि मौसम ने साथ दिया और बरसात हुई तो अच्छी फसल की उम्मीद बढ़ जाती है, यदि मानसून धोखा दे जाए तो किसानों के लिए चिंता का विषय बन जाता है।बरसात ना होने से फसलों पर लागत बढ़ जाती है और इस कारण खेती में फायदे की जगह घाटा हो जाता है।
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