पडरौना/कुशीनगर। जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ0 मेनका ने सरसों एवं गेहूँ मे लगने वाले कीट/रोग की रोकथाम हेतु किसान भाईयों को विधियों से बीज एवं भूमि शोधन हेतु उपायों के क्रम में बताया कि *सरसों*- हेतु सफेद गेरूई और तुलासिता रोग की रोकथाम हेतु मेटालेक्सिल 35 प्रतिशत डब्ल्यू एस की दो ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज की दर से शोधित करें।
*अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा* रोग के नियंत्रण के लिये थीरम 75 प्रतिशत डब्ल्यू एस की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज की दर से शोधित करें।
सफेद रोली एवं मृदुरोमिल आसिता: रोग की रोकथाम हेतु कार्बोक्सिन + थीरम की 3 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम की दर से शोधित करें।
गेहूँ का अनावृत्त कंन्डुआ एवं करनाल बन्ट एक बीज जनित रोग है इसके रोकथाम हेतु ट्राइकोडर्मा बायोपेस्टिसाइड की 2.5 किलोग्राम मात्रा को 60 से 75 किलोग्राम गोबर की खाद में मिलाकर भूमिशोधन करें तथा 5 ग्राम ट्राइकोडर्मा बायोपेस्टिसाइड को प्रति किलोग्राम की दर से शोधित करें। रसायनिक उपचार हेतु कार्बान्डाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यू पी० की 2 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज की दर से शोधित करने से उक्त बीमारी का प्रकोप नही होता है।
गेहूँ में दीमक से बचाव हेतु 4 कुन्टल नीम की खली प्रति एकड़ की दर से बुआई से पूर्व खेत में मिलाने से दीमक के प्रकोप में कमी आती है। सफेद गिडार एवं कटवर्म तथा दीमक के नियंत्रण हेतु बायोपेस्टिसाइड व्यूवैरिया वैसियाना की 2.5 किलोग्राम मात्रा को 60 से 75 किलोग्राम गोबर की खाद में मिलाकर भूमिशोधन करें।
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