कुशीनगर। तमकुही विकास खंड के ग्राम पंचायत बरवाराजापाकड के बहुरिया टोला स्थित कठबसिया देवी स्थान पर आयोजित 15 वेंं कठबसिया महोत्सव के छठवें दिन सोमवार की रात्रि कथावाचक स्वामी विभूति नारायण महराज ने ताड़का वध व अहिल्या उद्धार की कथा सुनाई।
विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को यज्ञ की रक्षा के लिए अपने साथ ले जाते हैं। रास्ते में श्री राम ताड़का का वध करते हैं। असुरों का वध के बाद दोनों भाई गुरु के साथ मिथिला के राजा जनक के यहां धनुष यज्ञ में शामिल होने जा रहे थे तो, उन्हें रास्ते में एक आश्रम मिला, जहां एक विशाल पत्थर का टुकड़ा पड़ा था। राम ने जब गुरु विश्वामित्र से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि यह गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या है जो, श्राप के कारण पत्थर हो गई है। राम का चरणरज पाते ही पत्थर नारी हो गई। अहिल्या का उद्धार हुआ और वे श्रीराम के दर्शन पाकर धन्य हो गई। इस दौरान महंत नारायण दास, हरिकेश दास, विभूति ठाकुर आदि मौजूद रहे।
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