तमकुहीराज। सूबे की सरकार का भ्र्ष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की मंशा का तमकुहीराज तहसील में खुला मखौल उड़ाया जा रहा है।हर बात में नियमो का हवाला देने वाले एसडीएम तमकुहीराज की कार्यशैली की इन दिनों चहुँओर चर्चा है और लोगो की चर्चाओं पर बिश्वास किया जाए तो उनके फैसले में भ्र्ष्टाचार की गंध आ रही है और उनके कारनामो से न सिर्फ सरकार की छवि प्रभावित हो रही है बल्कि सरकार के जीरो टॉलरेंस नीति का माखौल भी उड़ाया जा रहा है। लगातार हो रही चर्चाओं को संज्ञान में लेकर जब कुछ मामलों का पड़ताल किया गया तो साहब की कारगुजारी सामने आ गयी जिसका क्रमवार ब्यौरा प्रस्तुत किया जा रहा है जिसे देख कर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि साहब की कार्यशैली कैसी है।
अबैध अंतरण कर सरकार को लगाया लाखो का चपत: तमकुहीराज, स्थानीय तहसील के ग्राम सभा सपही में एसडीएम तमकुहीराज द्वारा नियमो को धता बताकर धारा 144 का दुरूपयोग कर गाटा संख्या 964 मि./0.405 हे.ब्यवसायिक/आबादी की भूमि का अबैध अंतरण किया गया है जिससे राज्य सरकार को सीधे तौर पर लगभग एक करोड़ रुपये की राजस्व की क्षति पहुंचाई गई है।उक्त जमीन में हाईटेक स्कूल संचालित है उस जमीन के विक्रय/खरीद में भारी भरकम लग रहे स्टैम्प ड्यूटी की चोरी के उद्देश्य से नियमो को दरकिनार कर एसडीएम द्वारा यह अबैध अंतरण कर सरकार को राजस्व की क्षति पहुंचाया गया है।कानून के जानकार लोगो के मुताबिक उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 144 के तहत सिर्फ कृषि योग्य भूमि पर ही यह धारा पोषणीय है और चकबंदी होने की वजह से धार 49 प्रतिबंधित करती है कि यहां 144 पोषणीय नही है जबकि जिस भूखंड का एसडीएम ने अबैध अंतरण किया है वह आबादी और ब्यवसायिक भूमि के स्वरूप में है और उस पर वेल इस्टेब्लिश तीन मंजिला स्कूल संचालित हो रहा है।इस धारा का लगातार हो रहे दुरुपयोग को रोकने के लिए राजस्व परिषद और सरकार ने इस पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाया है लेकिन इस मामले में साहब ने नियमो को ताक पर रखकर आदेश पारित कर दिया है जो सीधे तौर पर अबैध अंतरण कहा जा सकता है।मामले का भण्डाफोड़ होने के बाद सूत्र बताते है कि आनन फानन में सरकारी वकील से इस मामले में कायमी प्रार्थना पत्र भी मंगा लिया है।
मन्दिर की जमीन के मामले में भी दिया गलत फैसला: मंदिर और मठ की जमीन के मामले में भी साहब की कारगुजारी यह बताने के लिए काफी है कि उनके राज्य में क्या चल रहा था और न्याय कैसे दिया जा रहा था। बांसगांव में स्थित एक मंदिर/मठ की जमीन से जुड़े मामले में मन्दिर के मठाधीश के नाम से दर्ज जमीन को फर्जी तरीके से कुछ लोगो ने कसया एसडीएम का फर्जी आदेश दिखाकर अपने नाम करा लिया है। मामला जब न्यायालय में पहुंचा और मूल पत्रावली तलब हुई तो यह पाया गया कि कसया एसडीएम न्यायालय में इस नाम की कोई पत्रावली ही नही है और इस आशय का रिपोर्ट भी आ गया है इसके बावजूद भी एडसीएम साहब ने मियाद अधिनियम के धारा 5 के हवाला देकर कायमी को खारिज कर दिया है जबकि बताया यह जा रहा है कि मन्दिर के तरफ से कायमी देने वाले अधिवक्ता ने यह ब्यवस्था भी कोर्ट को दिया था कि फर्जी और वोगस इंट्री/आर्डर में मियाद अधिनियम प्रभावी नही होता है। जब यह प्रमाणित हो गया कि मूल पत्रावली ही नही है और यह आदेश संदिग्ध/फर्जी है और मंदिर की जमीन को अपने नाम से दर्ज कराने वाले लोगो के पास प्रॉपर्टी ट्रांसफर के कोई सबूत मौजूद नही है इसके बाद भी कायमी प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया गया है।मामला जब गोरखनाथ मन्दिर और क्षेत्रीय बिधायक तक पहुंचा तो साहब ने अधिवक्ता महोदय से बोलकर फिर से रिब्यू दाखिल कराया है और नोटिस का हवाला देकर मामले को अभी तक टरकाया जा रहा था।
भूस्वामी के बिना सहमति के ही पारित कर दिया विनमय का आदेश: तमकुहीराज तहसील के बसडीला खुर्द में लेखपाल रिपोर्ट बनाम ग्रामसभा के मुकदमे में एक गरीब परिवार की जमीन गाटा संख्या 291 /0.081 हे. को सिर्फ लेखपाल रिपोर्ट को आधार मानकर उक्त जमीन को दो टुकड़ों में बांटकर गाटा संख्या 290 व 292 से जबरिया विनिमय करने का एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया गया।गरीब इस अन्याय के लिए चीखता चिल्लाता रहा लेकिन साहब ने तानाशाही रवैया अख्तियार कर जबरिया विनिमय का आदेश पारित कर दिया।इस मामले में भी हो हल्ला होने के बाद तथा पीड़ित द्वारा आत्मदाह की धमकी दिए जाने के बाद साहब ने कायमी लेकर मामले को फिलहाल स्थगित कर दिया।
गलत ढंग से भूमिधर को जमीन बिक्री करने पर लगाया रोक: तमकुहीराज तहसील के ही सपही ग्रामसभा में स्थित खाता संख्या 453 के गाटा संख्या 951/3.844 हे कि जमीन में पवन सिंह आदि बनाम दीपक सिंह आदि के मामले में धारा 145 उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के तहत उक्त भूमि को विक्रय करने/अंतरण करने पर रोक लगाया है जो पूरी तरह नियमो के विपरीत है क्योंकि वादी न तो सहखातेदार है और न ही खतौनी में उसका कही नाम है लेकिन साहब ने यहां भी कानून का मान मर्दन करते हुए भूमिधर को गलत तरिके से विक्रय करने पर रोक लगा दिया है।जब सहखातेदार होने की दशा में ही यह धारा पोषणीय है तो किस परिस्थिति में दीगर ब्यक्ति द्वारा दायर किये गए मुकदमे में इस तरह का फैसला किया गया है यह जांच का विषय है।
चुनाव याचिका के फैसले को लेकर चर्चा में रहे साहब: न्याय का नैसर्गिक सिद्धान्त है कि सिर्फ न्याय होना ही काफी नही है बल्कि न्याय होते हुए भी दिखाई देना चाहिए लेकिन साहब ने ऐसा फैसला दिया कि चहुओर चर्चा में आ गए।ग्राम पंचायत के चुनाव में मामूली अंतर से हुई हार जीत के लगभग दर्जन भर मामले में पुनर्मतगणना की याचिका उपजिलाधिकारी के न्यायालय में दाखिल हुआ था। इनमें से कुछ मामलो में से तो मात्र एक से दो वोट का अंतर था लेकिन उन मामलों में भी याचिका खारिज कर दिया गया जिसको लेकर साहब खासे चर्चा में रहे।
तमकुहीराज के उपजिलाधिकारी रहे ब्यास नारायण उमराव द्वारा किये गए अनियमितता के मामले में मुख्यसचिव को विन्दुवार शिकायती पत्र देकर क्षेत्रीय विधायक डा असीम कुमार ने जांचोपरांत कार्रवाई की बात कही है।विद्यायक डॉ असीम कुमार के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार जनता द्वारा एसडीएम ब्यास नारायण उमराव के बारे में लगातार की जा रही शिकायत और तहसील में भ्र्ष्टाचार और बिचौलिया तंत्र के हावी होने की सूचना के बाद सारे मामलों की विन्दुवार शिकायत प्रमुख सचिव और जिलाधिकारी से की गई है जिसके क्रम में मुख्य सचिव ने प्रमुख सचिव नियुक्ति एवम कार्मिक को जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने का आदेश जारी किया है। डॉ असीम ने भ्र्ष्टाचार को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बढ़ावा देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दिया है कि वह सभी योगी सरकार के नीतियों के तहत कार्य करे भ्र्ष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नही किया जाएगा। एसडीएम के स्थानांतरण के बारे में बिद्यायक का कहना है कि सिर्फ स्थानांतरण से बात दबने वाली नही है मामले की जांच होगी और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई होगी।
जिलाधिकारी कुशीनगर रमेश रंजन ने कल देर रात ब्यास नारायण उमराव को तमकुहीराज से स्थानांतरित कर जिला मुख्यालय पर उपजिलाधिकारी न्यायिक बनाया है तथा उनकी जगह पर विकास चन्द्र को तमकुहीराज का नया उपजिलाधिकारी तैनात किया है। आज सुबह नवागत उपजिलाधिकारी विकास चन्द्र ने तमकुहीराज तहसील पहुंचकर विधिवत कार्यभार ग्रहण कर लिया है।नवागत उपजिलाधिकारी ने कार्यभार ग्रहण करने के साथ यह संदेश दिया है कि वह सरकार के नीतियों के तहत कानून का राज कायम करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा वह जन अकंक्षाओ पर खरा उतरते हुए आम जन के समस्याओं के समाधान का पुरजोर प्रयास करेंगे।
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