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मदनपुर जंगल के बीच में स्थापित है ये खास मंदिर, इसकी कहानी जानकर हैरान रह जाएंगे

Sanjay Pandey

Reported By:

Sep 25, 2022  |  9:09 PM

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मदनपुर जंगल के बीच में स्थापित है ये खास मंदिर, इसकी कहानी जानकर हैरान रह जाएंगे
  • पनियहवा से आगे एन एच 727 पर सालिकपुर चौकी से आगे मदनपुर जंगल में स्थित है सिद्धपीठ मदनपुर देवी स्थान

खड्डा/कुशीनगर। यूपी और बिहार से सटे वाल्मीकि टाईगर रिजर्व के मदनपुर जंगल में विख्यात मदनपुर देवी मंदिर है। यह मंदिर नेपाल, बिहार और यूपी के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। इनके बीच में देवी मां के भक्त रहसू गुरू की कथा प्रचलित है।

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बताया जाता है कि रहसू गुरु बाघों के गले में सांप की रस्सी लपेट दवंरी (फसलों की मड़ाई) करते थे। कोरोना काल में हालांकि मन्दिर पहुंचने वाली की संख्या कम रही। लेकिन शारदीय नवरात्र में सोमवार से मंदिर पर भक्तों का जमावड़ा लगने की संभावना है। बताया जाता है कि मदनपुर देवी स्थान पर पहले घना जंगल हुआ करता था, यह राजा मदन सिंह नाम के राज्याधीन था। एक बार जंगल में शिकार करने राजा पहुंचे तो उनको पता चला कि एक रहसू गुरू साधु उनके इन जंगलों के बीच बाघों के गले में सांप बांधकर पतहर (खर पतवार) की मड़ाई (दंवरी) करता है और उसमें से कनकजीर (सुगंधित धान की प्रजाति) निकलता है।

राजा को घोर आश्चर्य हुआ, सच्चाई जानने के लिए राजा सैनिकों के साथ मौके पर पहुंचे तो नजारा देख हैरान रह गए। राजा ने हठ करते हुए साधु से देवी जी को बुलाकर दिखाने का आदेश सुनाया। साधु ने राजा को समझाते हुए कहा कि ऐसी जिद्द न करें बेवजह देवी मां को बुलाना संकट को मोल लेना होगा, देवी कुपित हुई तो आपके राजपाट का सर्वनाश हो जाएगा। समझाने के बाद भी राजा मदन जिद्द पर अड़े रहे, जब साधु के जान पर बन आई तो भारी मन से देवी का आह्वान किया। कहा जाता है जगदंबा असम के कामख्या से चली और खंहवार नामक स्थान पर पहुंची, वहां से थावें पहुंची (दोनों जगह मंदिर स्थापित है)।
कहा तो यह भी जाता है कि भक्ति से प्रसन्न देवी मां ने रखवाली के लिए एक बाघ प्रदान किया जो हरिचरण के साथ रहता था।

धीरे-धीरे इसकी चर्चा चारों तरफ फैल गई। पहले यहां पहुंचना काफी मुश्किल था, दो दशक पहले गंडक नदी पर छितौनी बगहा पुल बन जाने से यूपी के भी लाखों श्रद्धालु देवी दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां मंदिर का निर्माण हो गया है, नेपाल, बिहार, उत्तर प्रदेश के कई जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी दर्शन के साथ ही शादी विवाह मुंडन आदि धार्मिक कार्य करते हैं। यहां मान्यता है कि भक्तों की मनोवांछित मनोकामना पूर्ण होती हैं। जिनकी मुराद पूरी हो जाती है, बकरे की बलि भी चढ़ाते हैं।

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