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यूपी में पूर्व विधायकों को मिलने वाली पेंशन और सुविधाएं जानकर चौंक जाएंगे आप, जानें सरकार पर कितना पड़ रहा राजस्व का बोझ

न्यूज अड्डा डेस्क

Reported By:

Mar 31, 2022  |  11:03 AM

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यूपी में पूर्व विधायकों को मिलने वाली पेंशन और सुविधाएं जानकर चौंक जाएंगे आप, जानें सरकार पर कितना पड़ रहा राजस्व का बोझ

उत्तर प्रदेश | देश के सभी राज्‍यों में पूर्व विधायकों को अलग अलग सैलरी मिलती है। वही अगर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की बात करे तो यहाँ पर लगभग 2200 पूर्व है इनमे से कुछ का निधन भी हो हो जाने के कारण उनकी आश्रित पत्नियों को दस हजार रुपये की पेंशन मिल रही है. उत्तर प्रदेश में विधायक के हर कार्यकाल के बाद पेंशन बढ़ती जाती है। इससे सरकार के खजाने पर करीब 65 करोड़ प्रति वर्ष का पेंशन बोझ पड़ रहा है.

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आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश में पूर्व विधायकों को कितनी पेंशन मिलती है? इसके अलावा उन्हें और क्या सुविधा मिलती है?

  • उत्तर प्रदेश में 2000 से ज्यादा पूर्व विधायक हैं।
  • उत्तर प्रदेश में पूर्व विधायकों को हर महीने 25 हजार रुपए पेंशन मिलती है।
  • 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले विधायकों की पेंशन में हर साल 2 हजार रुपए की बढ़ोतरी होती जाती है।
  • यानी 10 साल विधायक रहने वालों को हर महीने 35 हजार रुपए की पेंशन मिलती है।
  • इसी तरह 15 साल विधायक रहने वालों को हर महीने 45 हजार रुपए की पेंशन मिलती है।
  • 20 साल विधायक रहने वालों को हर महीने 55 हजार रुपए की पेंशन मिलती है।
  • विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके लोगों, यानी MLA और MLC को मिलने वाले पेंशन और सुविधाएं एक ही होती हैं।
  • पूर्व विधायकों को सालाना एक लाख रुपए का रेल कूपन मिलता है, जिसमें से 50 हजार रुपए निजी वाहन के डीजल, पेट्रोल के लिए कैश लिए जा सकते हैं।
  • इसके अलावा जीवन भर मुफ्त रेलवे पास और मुफ्त मेडिकल सुविधा का लाभ मिलता है।
  • उत्तर प्रदेश में पिछले 9 बार से विधानसभा का चुनाव जीतने वालों में भाजपा के सुरेश खन्ना, सपा के दुर्गा यादव हैं, जबकि आजम खान 10वीं बार जीते हैं।
  • किसी भी पूर्व विधायक की मृत्यु होने पर उनके आश्रित पत्नी को सिर्फ ₹10,000 ही पेंशन देने की व्यवस्था है.
  • 2016 में अखिलेश यादव सरकार ने उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायकों की पेंशन को 10 हजार रुपए प्रति महीने से बढ़ाकर 25 हजार रुपए प्रति माह किया था।

भारत में सांसद और विधायक खुद अपनी सैलरी बढ़ाने पर फैसला करते हैं

दुनिया के अनेक देशों में जनप्रतिनिधियों को वेतन और सुविधाएं मिलती हैं। हालांकि, इसे वह खुद नहीं तय करते हैं बल्कि इसे तय करने का अधिकार अलग संस्थाओं को रहता है। इसके लिए उम्र और सेवा की सीमा तय है। वहीं, ब्रिटेन जैसे देश में इसके लिए आयोग का गठन किया गया हैं। हालांकि, भारत में सांसद व विधायकों की सुविधाओं के संबंध में क्रमश: संसद व विधानसभाएं ही फैसला लेती हैं।

विदेशों में कौन तय करता है सांसदों की सैलरी में बढ़ोतरी

कनाडा में सालाना बढ़ोतरी: हर साल तय होती है और ये पिछले साल के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर आधारित होती है।

ब्रिटेन में है आयोग: इंडिपेंटेंड पार्लियामेंट्री स्टैंडर्ड अथॉरिटी में शामिल सांसद, ऑडिटर और पूर्व जज तय करते हैं। सैलरी में सालाना संशोधन होता है, जो पब्लिक सेक्टर की औसत इनकम के अनुसार होता है।

ऑस्ट्रेलिया में एक्सपर्ट्स तय करते हैं: सरकार, इकोनॉमी, कानून और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के एक्सपर्ट्स तय करते हैं, सालाना संशोधित होती है।

न्यूजीलैंड में स्वतंत्र संस्था तय करती है: जज, सांसद और स्वतंत्र कानूनी संस्थाएं तय करती हैं, ये सदन में सांसद या विधायक के पद पर आधारित होती है।

फ्रांस में सिविल सेवकों की सैलरी से तय होता है: हाईएस्ट ग्रेड वाले सबसे ज्यादा और सबसे कम सैलरी वाले सिविल सेवकों की सैलरीज के औसत से तय होती है। सिविल सेवकों की सैलरी को सदन के कोषाध्यक्ष (तीन सांसद) तय करते हैं।

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