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गुरुपूर्णिमा विशेष●घर में बड़ों का आर्शिवाद भी जरुर लें:-म़हंत स्वामी परमहंस श्री गिरीजी महराज.।

Omprakash Dwivedi

Reported By:

Jul 12, 2022  |  9:06 PM

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गुरुपूर्णिमा विशेष●घर में बड़ों का आर्शिवाद भी जरुर लें:-म़हंत स्वामी परमहंस श्री गिरीजी महराज.।

पालघर।  हिंदू धर्म में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान माना गया है। शास्त्रों में गुरु को भगवान से भी बड़ा माना गया है। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का पर्व आज बुधवार 13 जुलाई को मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन महाभारत सहित 18 वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। यही कारण हैं कि गुरु पूर्णिमा के दिन व्यास जयंती भी मनाई जाती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार गुरु पूर्णिमा 13 जुलाई को सुबह चार बजे से शुरू होकर 14 जुलाई को रात 12 बजकर छह मिनट पर खत्म हो रही है.। गुरु पूर्णिमा पर सुबह से ही इंद्र योग बन रहा है जो दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं रात 11 बजकर 18 मिनट तक पूर्वाषाढा नक्षत्र रहेगा। ज्योतिषाचार्य डाँ. एकदेव एस.शरण

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के अनुसार इस बार गुरु पूर्णिमा में राज योग बना है। गुरु पूर्णिमा के दिन रूचक, भद्र, हंस और शश नाम के चार महत्वपूर्ण योग बन रहे हैं। जिसे राजयोग कहा गया है। महर्षि वेदव्यास जी के जयंती के निमित्त गुरुपूजन का विधान है।
निरंजनी पंचायती आखाड़ा कनखल हरिद्वार के महंत स्वामी डाँ. परमहंस श्री गिरी जी महराज

ने “न्यूज़ अड्डा” से गुरुपूर्णिमा पर बातचीत करते बताते है कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि के संयासी जनों के चातुर्मास्यारंभ के शुभ दिवस पर गुरुपूर्णिमा का पर्व हर वर्ष मनाया जाता है। यह शुभ दिन गुरुपूजन के लिए निर्धारित है।इस विशेष दिवस पर शिष्य गण अपने गुरुजनों का पूजन अशिष ग्रहण करते है।गुरुजनों के पूजन का महत्व अत्यधिक इसलिए है कि गुरुकृपा से हमें ज्ञान, मनोवांछित फल,परिवार में सदकर्म की पूर्ति होती है। पहले भी गुरुकुल में अध्ययन रत्त विद्यार्थी गुरुपूर्णिमा पर गुरुजनों की पूजा अर्चना किया करते थे।इस दिन घरों के बड़ों का भी चरणस्पर्श करते हुए जरूर आशिष लेना चाहिए।
बुधवार को सुबह नित्यक्रिया से निवृत हो स्नान ध्यान के बाद गुरुजनों के आशिष के लिए उनके यहां जरुर पहुंचे।यदपि ऐसा संभव नही है तो गुरुजन की तस्वीर को स्वच्छ पवित्र स्थान पर विराजमान करते हुए पुष्पमाला चढा़कर चंदन का तिलक तथा प्रसाद भेंटकर मन बचन से श्रद्धापूर्वक गुरुपूजन करें और गुरुप्रसाद को परिवार तथा इष्टमित्रों में भेंट करें.।

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