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तमकुहीराज: साधना के बाद ही होता हैं प्रभु राम भगवन का दर्शन -अतुल कृष्ण भारद्वाज

न्यूज अड्डा डेस्क

Reported By:

Mar 15, 2021  |  8:05 AM

952 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
तमकुहीराज: साधना के बाद ही होता हैं प्रभु राम भगवन का दर्शन -अतुल कृष्ण भारद्वाज

अशोक कुमार द्विवेदी

  • सलेमगढ़ में श्री रामकथा अमृत वर्षा का अष्टम दिन

तमकुहीराज | शबरी के भक्ति से प्रभावित होकर श्रीराम ने शबरी के जूठे बेर खाकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया । स्वर्ण मृग ( सोने का हिरण ) की घटना का बड़े ही रोचक ढंग से वर्णन करते हुए कहा कि जब भक्त भगवान से विमुख होकर केवल भौतिक साधनों की ओर आकर्षित होती है । तब उसे भगवान प्राप्ति के लिए भटकना ही पड़ता है ।

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उक्त बातें रविवार को सलेमगढ़ के शिव मंदिर के बगल में श्री राम कथा समिति द्वारा आयोजित राम कथा की अमृत वर्षा कराते हुये प्रख्यात श्रीराम कथा वाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज जी ने कही। उन्होनें कथा को आगे बढ़ाते हुये कहा की जैसे मां सीता जानकी सोने का हिरण नहीं हो सकता परन्तु सोने की लालच में प्रभु श्रीराम जैसे सोने को भूल गई जटायु के प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि जो दूसरों की सेवा में लगा रहता है । उसकी चिंता स्वयं भगवान करते है । जैसे जटायु ने मां सीता की रक्षा के लिए अपनी प्राणा को न्योछावरा किया तो प्रभु श्रीराम ने एक अधम पक्षी गिद्ध जाति को उठाकर अपने गोदी में बैठा कर सीने से लगाया ,जिस का परिणाम श्री तुलसी दास जटायु को मानस में परम बडभागी कहा और जटायु सीधे भगवान को विमान से सीधे स्वर्ग में स्थान को प्राप्त किया । जैसे शबरी भगवान की भक्त थी फिर भी श्रीराम यह जानते हुए कि वह भीलनी जाति की है इसके बावजूद उसके जूठे बेरो को खाकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया । भगवान की साधना में जाति पाति का भेदभाव नही होता है । भगवान शबरी को नवधा भक्ति का उपदेश दिये । महाराज जी ने आगे कहा कि सुग्रीव से मिलना व बालि बा के प्रसंग के माध्यम से समाज को संदेश दिया कि अधर्म कितना भी मजबूत हो अंत में उसे पराजित होना पड़ता है और आधर्म पर धर्म की विजय सदैव होती है । सोने की तो दूर की बात लोहे का भी पात्र नहीं – लेकिन भगवान श्रीराम ने एकाएक केवट को अनुमति नहीं दी । को कई जतन के बाद केवट को पैर धोने की अनुमति मिली । तब केवट अपने घर जाकर पत्नी को सारी घटना के बारे में बताया तो पत्नी भावुक हो गई । पत्नी ने कहा कि आज प्रभु के चरण धोने का सौभाग्य मिला है । लेकिन घर में सोने के पात्र तो दूर की बात है लोहे के पात्र भी नहीं है । तब केवट ने कहा कि घर में कठौता जो लकड़ी का पात्र है किसमें प्रभु के चरण धोने की बात कही । वहीं कथा के मुख्य यजमान सलेमगढ़ निवासी प्रसिद्ध समाजसेवी राजकुमार साह ने ब्यास गद्दी पर विराजमान अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज जी का माल्यार्पण करने के साथ -साथ रामायण जी का पूजन अर्चन किया। यहाँ बताना लाजमी है की समाज सेवी राजकुमार साह द्वारा आज इस कथा के आयोजक श्री राम कथा समिति को इक्यावन हजार रुपए का सहयोग प्रदान किया गया। कथा आयोजक मंडल के देशबन्धु कश्यप,शिव जी गुप्त, पंकज गुप्त, प्रमोद गुप्त, समाजसेवी नारायण गुप्त, ओमप्रकाश सिंह, राजू गुप्त, राजेश रौनियार,उग्रसेन राय, अविनाश श्रीवास्तव, जिला पंचायत सदस्य प्रेम चंद्र यादव, राधेश्याम पटेल, उमेश चौरसिया, धनेध गुप्त, राजनाथ गुप्त, संजय शर्मा आदि दर्शक उपस्थित रहे।

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