कप्तानगंज। बस्ती स्थानीय विकास खंड के गांव महुवारी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास पं चन्द्रभान मिश्र ने कहा कि श्रीमद्भागवत सुनने का लाभ भी कई जन्मों के पुण्य से अधिक प्राप्त होता है। कथा मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है। मनुष्य को जीवन परमात्मा ने दिया है, लेकिन जीवन जीने की कला हमें सत्संग से प्राप्त होती है। सत्संग का मनुष्य के जीवन में बड़ा महत्व है। श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन कथा व्यास पं चन्द्रभान मिश्र ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा का वाचन करते हुए कहा कि भगवान भक्तों के वश में हैं। भगवान हमेशा अपने भक्तों का ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर पाप, अनाचार बढ़ता है, तब-तब भगवान श्रीहरि धरा पर किसी किसी रूप में अवतार लेकर भक्तों के संकट को हरते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों का उद्धार व पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग व उनके जन्म लेने के गूढ़ रहस्यों को कथा व्यास ने बेहद संजीदगी के साथ सुनाया। कथा प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। इस दौरान नंद घर जन्में कन्हैया.., कान्हा अब तो ले लो अवतार बृज में.., में तो नंद भवन में जाऊंगी.., यशोदा जायो ललना.., श्याम तेरी वंशी पुकारे राधा राम भजनों को सुन श्रोता मंत्रमुग्ध हो थिरकने को मजबूर हो गए।
इस दौरान मुख्य यजमान शकुंतला देवी पत्नी स्व महेन्द्र गिरी,राम अजोर गिरी जनार्दन गिरी रमेश गिरी, अनिल कुमार गिरि, संजय गिरि, सुनील गिरी, संजय गिरी, सुशील गिरी,चंद्रमा देवी, मालती देवी, दुर्गावती देवी अमेरिका देवी ऊषा देवी, चांदनी, प्रीति, संध्या मीना सीमा अंकुर, सहित अन्य श्रोता मौजूद रहे।
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